हेमंत यादव बारां
बारां, 07 अक्टूबर 2026। दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और समावेशी शिक्षा को नई दिशा देने के उद्देश्य से भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अधीन संचालित समेकित क्षेत्रीय कौशल विकास, पुनर्वास एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण केंद्र (सीआरसी), जयपुर द्वारा आज बारां में एक दिवसीय राज्य स्तरीय सीआरई (सतत पुनर्वास शिक्षा) कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का विषय ‘समावेशी शिक्षा: समानता, सुलभता और उत्कृष्टता का मार्ग’ रखा गया था। इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में बारां सहित कोटा, बूंदी, झालावाड़, सवाई माधोपुर सहित राजस्थान के 12 जिलों से लगभग 200 पुनर्वास पेशेवर, विशेष शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों ने भागीदारी की।
आकांक्षी जिले में ऐसे कार्यक्रमों की निरंतर आवश्यकता - एडीएम
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कार्यवाहक अतिरिक्त जिला कलेक्टर श्री रामावतार मीणा उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में सहायक निदेशक जनसंपर्क श्री योगेन्द्र शर्मा एवं प्रशिक्षु आरएएस अधिकारी श्री शिशुपाल सिंह मौजूद रहे।
अपने उद्बोधन में कार्यवाहक एडीएम श्री रामावतार मीणा ने कहा कि बारां एक आकांक्षी जनपद है, यहां शिक्षा और पुनर्वास के क्षेत्र में अभी बहुत काम करने की आवश्यकता है। इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे पुनर्वास व्यवसायियों का क्षमता संवर्धन होता है, जिसका सीधा लाभ जिले के दिव्यांग बच्चों और उनके परिवारों को मिलता है। उन्होंने सीआरसी जयपुर द्वारा बारां को इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लिए चुने जाने पर आभार व्यक्त किया और कहा कि समावेशन को सफल बनाने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायती राज सहित सभी स्टेकहोल्डर्स को एक मंच पर आना होगा।
विशेषज्ञों ने रखे विचार
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सीआरसी जयपुर के निदेशक श्री नीरज मधुकर ने अपने व्याख्यान में भारत में समावेशी शिक्षा की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समावेशी शिक्षा केवल दिव्यांग बच्चों को सामान्य स्कूल में प्रवेश दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें समान अवसर, गरिमापूर्ण माहौल और उनकी आवश्यकता के अनुसार संसाधन उपलब्ध कराना है। उन्होंने आरपीडब्ल्यूडी एक्ट 2016, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और समग्र शिक्षा के प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार, अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता और प्रारंभिक पहचान एवं हस्तक्षेप (Early Identification & Intervention) को मजबूत करके ही हम सच्चे समावेशन को प्राप्त कर सकते हैं।
तकनीकी सत्र के दौरान श्री सोम कृष्ण ने समावेशन में तकनीक (Technology) और सुगम्यता (Accessibility) की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि कैसे आज तकनीक दिव्यांगजनों के लिए वरदान साबित हो रही है। उन्होंने प्रायोगिक तौर पर कई उपयोगी मोबाइल एप्लिकेशन, स्क्रीन रीडर और माइक्रोसॉफ्ट वर्ड, पीपीटी में उपलब्ध एक्सेसिबिलिटी चेकर, ऑल्ट टेक्स्ट जैसे फीचर्स का लाइव डेमो दिया, जिसे प्रतिभागियों ने बहुत सराहा।
इसके पश्चात श्री कुलदीप सिंह, सहायक प्राध्यापक, सीआरसी जयपुर ने यूनिवर्सल डिजाइन फॉर लर्निंग (UDL) विषय पर गहन व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि UDL एक ऐसी शिक्षण पद्धति है जो कक्षा में हर तरह के बच्चों की सीखने की शैली को ध्यान में रखती है। उन्होंने उच्च शिक्षा में समावेशन को बढ़ावा देने हेतु विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में किए जा सकने वाले सुधारों पर चर्चा की।
हार्टफुलनेस ध्यान सत्र रहा आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम के समापन सत्र में सहायक निदेशक जनसंपर्क श्री योगेन्द्र शर्मा द्वारा हार्टफुलनेस पर आधारित एक विशेष परिचयात्मक ध्यान सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में सभी 200 प्रतिभागियों ने ध्यान का अभ्यास किया और जाना कि कैसे ध्यान के माध्यम से आंतरिक संतुलन, एकाग्रता और मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझा जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को सीआरई क्रेडिट पॉइंट के साथ प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम का संचालन सीआरसी जयपुर की टीम द्वारा किया गया।

