लोकायुक्त ट्रैप के बाद अब वित्तीय अनियमितता में कार्रवाई, निलंबन पर कांग्रेस ने की आतिशबाजी
अमन खान इंकलाबी
राजगढ़। स्वास्थ्य विभाग में प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शोभा पटेल के निलंबन के बाद गुरुवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया। कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी कर कार्रवाई का स्वागत किया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि डॉ. पटेल के खिलाफ लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं और कार्रवाई में देरी हुई।
डॉ. शोभा पटेल को लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मृत कर्मचारी के नाम पर कई महीनों तक वेतन भुगतान किए जाने के मामले में तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। विभागीय आदेश के अनुसार स्वास्थ्य विभाग की सफाईकर्मी सुमित्रा बाई की 18 जनवरी 2025 को मृत्यु हो चुकी थी। इसके बावजूद उनके नाम पर ₹14,844 प्रतिमाह वेतन का भुगतान अक्टूबर 2025 तक जारी रहा।
मामले की शिकायत मिलने के बाद क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल संभाग के माध्यम से जांच कराई गई। तीन सदस्यीय जांच दल ने प्रकरण की जांच की। जांच में सामने आया कि कर्मचारी की मृत्यु की सूचना संबंधित अधिकारियों को दिए जाने और उपस्थिति पत्रक में नाम नहीं होने के बावजूद उसके नाम पर वेतन भुगतान जारी रहा। विभाग ने इसे वित्तीय अनियमितता माना।
जांच में तीन लोगों की भूमिका सामने आई
क्षेत्रीय संचालक द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर विभाग ने डॉ. शोभा पटेल के साथ तत्कालीन सेवानिवृत्त लेखापाल रामगोपाल नारेड़ा और लेखापाल दिनेश पारिक की भूमिका का भी उल्लेख किया है। आदेश में डॉ. पटेल पर पद के दुरुपयोग और स्वेच्छाचारिता बरतने तथा शासन को वित्तीय क्षति पहुंचने की स्थिति बनने का उल्लेख किया गया है।
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त धनराजू एस ने 1 अक्टूबर को आदेश जारी कर डॉ. शोभा पटेल को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल संभाग के कार्यालय में रहेगा।
लेखपाल दिनेश पारीक का मुख्यालय नर्मदा पुरम के कार्यालय.रहेगा
लोकायुक्त ट्रैप के बाद ट्रांसफर पर हाईकोर्ट की रोक
डॉ. शोभा पटेल इससे पहले 17 अप्रैल 2026 को लोकायुक्त की कार्रवाई को लेकर भी सुर्खियों में आई थीं। उन्हें ₹20 हजार की कथित रिश्वत लेते ट्रैप किए जाने की कार्रवाई हुई थी। शिकायत में ₹50 हजार की कथित मांग का आरोप सामने आया था।
इसके बाद शासन ने उनका राजगढ़ से स्थानांतरण किया था। 27 अप्रैल 2026 के ट्रांसफर आदेश को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिस पर अदालत ने अंतरिम रोक लगाई थी। इसके चलते वे राजगढ़ में अपने पद पर बनी रहीं।
निलंबन पर कांग्रेस का जश्न, पूरे कार्यकाल की जांच की मांग
अब निलंबन की कार्रवाई के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया और आतिशबाजी की। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि डॉ. शोभा पटेल पर लगातार भ्रष्टाचार और पैसों की मांग किए जाने संबंधी शिकायतें सामने आती रही हैं। नेताओं ने कार्रवाई में देरी को लेकर भी सवाल उठाए।
कांग्रेस नेताओं ने डॉ. पटेल पर व्यवस्था के लिए गंभीर रूप से नुकसानदायक होने जैसे आरोप लगाए और कहा कि सिर्फ निलंबन पर्याप्त नहीं है। उन्होंने डॉ. शोभा पटेल के कार्यकाल में हुई वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं की व्यापक जांच कराने और शिकायतों के आधार पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
अब मृत कर्मचारी के नाम पर हुए वेतन भुगतान की राशि, भुगतान प्रक्रिया और इसमें शामिल प्रत्ये
