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आत्मनिर्भर दलहन व कपास उत्पादकता अभियान के तहत अल्लीपूर-कांचनगांव में प्रदर्शन प्लॉट का निरीक्षण: NN81

 

 आत्मनिर्भर दलहन व कपास उत्पादकता अभियान के तहत अल्लीपूर-कांचनगांव में प्रदर्शन प्लॉट का निरीक्षण: 

वर्धा जिले में कृषि विभाग के आत्मनिर्भर दलहन अभियान के तहत तुअर फसल और कपास उत्पादकता अभियान के अंतर्गत कांचनगांव के किसानों के प्रदर्शन प्लॉट का अधिकारियों ने दौरा कर निरीक्षण किया।

कृषि विभाग द्वारा चलाए जा रहे आत्मनिर्भर दलहन अभियान और कपास उत्पादकता अभियान के तहत हिंगणघाट तहसील के अल्लीपूर-कांचनगांव में किसानों के प्रात्यक्षिक प्लॉटों की अधिकारियों ने प्रत्यक्ष जांच की।

इस दौरान उपविभागीय कृषि अधिकारी, हिंगणघाट स्वप्नील तोरणे, तकनीकी अधिकारी परमेश्वर घायतीडक, मंडल कृषि अधिकारी शुभ्रकांत भगत, अल्लीपूर के कृषि पर्यवेक्षक आर. कुंभरे ने फसल की स्थिति का जायजा लिया। 

अधिकारियों ने फसल की संवेदनशील अवस्था को पहचानते हुए, उत्पादन खर्च कम रखकर उत्पादन बढ़ाने के लिए जलवायु अनुकूल तकनीक और कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को लेकर विस्तार से मार्गदर्शन किया।

कपास और तुअर फसल की वर्तमान स्थिति, वृद्धि की संवेदनशील अवस्थाएं, कीट और रोगों का प्रकोप और किसानों द्वारा किए जा रहे प्रबंधन उपायों की समीक्षा की गई। विभिन्न कीटों और रोगों की पहचान, लक्षण, प्रकोप की शुरुआती अवस्था को पहचानना और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए एकीकृत कीट व रोग प्रबंधन, उन्नत फसल प्रबंधन, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, जल प्रबंधन, अंतर-मशागत और समय पर नियंत्रण के बारे में मार्गदर्शन दिया गया।

किसानों को कामगंध जाल, पीले चिपचिपे जाल और फेरोमोन ट्रैप अपनी पसंद के अनुसार खरीदने और क्षेत्रीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में DBT सिद्धांत के अनुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए। साथ ही किसानों द्वारा स्वयं तैयार किए गए जैविक आदानों के उपयोग और नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी प्रकल्प चरण 2.0 के तहत CBDC आवेदन की संख्या बढ़ाने का आह्वान किया गया।

महिला किसान सशक्तिकरण अधिनियम को लेकर जनजागरूकता

इस अवसर पर महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण अधिनियम 2026 के बारे में भी मार्गदर्शन किया गया। खेती की रीढ़ को मजबूत करने के लिए महिलाओं को केवल सहयोगी नहीं बल्कि स्वतंत्र किसान के रूप में मान्यता देना समय की जरूरत है और इस अधिनियम के जरिए महाराष्ट्र ने देश में पहला कदम उठाया है। डिजिटल पंजीकरण से योजनाओं का नियोजन और लाभ वितरण अधिक पारदर्शी होगा और स्वतंत्र निधि, कौशल विकास, उद्यमिता और बाजार तक पहुंच से महिला किसानों का आर्थिक व सामाजिक सशक्तिकरण होगा, ऐसा उपविभागीय कृषि अधिकारी ने बताया। उन्होंने क्षेत्रीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए।

इस कार्यक्रम में सहायक कृषि अधिकारी पंकज चौधरी, क्लस्टर असिस्टेंट आशिष बगवे और प्रगतिशील किसान मंगेश खोडे, सतीश कापसे, सुनील हिंगे, रमेश डफ, साहिल खोडे आदि उपस्थित थे।

वर्धा से सतीश काळे की रिपोर्ट

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