राजस्व की जमीन पर कब्जे का खेल जिम्मेदारो की खामोशी से सिकुड़ रही है उप तहसील की जमीन। कच्जे के बाद पक्के निर्माण शुरू : NN81
सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हो तो उसे हटाने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की होती है, लेकिन अरनिया कलां में तस्वीर इसके उलट है। यहां उप तहसील के लिए आरक्षित सरकारी जमीन पर ही धीरे-धीरे कब्जा बढ़ रहा है। कच्चे निर्माण के बाद अब पक्के निर्माण भी होने लगे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के बजाय प्रस्ताव और फंड आने का इंतजार कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार अरनिया कलां में उप तहसील के लिए करीब 5 हेक्टेयर भूमि दर्ज है। ग्रामीणों के अनुसार लंबे समय से अतिक्रमण होने के कारण इसका बड़ा हिस्सा उपयोग से बाहर हो गया है और करीब 2 हेक्टेयर जमीन ही बची है। अब इस बचे हिस्से पर भी कब्जे की कोशिशें जारी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सरकारी जमीन की सीमांकन कर बाउंड्री नहीं कराई गई तो बची हुई जमीन भी धीरे-धीरे कब्जे में चली जाएगी।
सरकारी जमीन की रखवाली में ही विभाग बेबस
अतिक्रमण हटाने वाले राजस्व विभाग की अपनी जमीन ही सुरक्षित नहीं है। उप तहसील परिसर में बाउंड्रीवाल नहीं होने का फायदा उठाकर लोग धीरे-धीरे निर्माण कर रहे हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि जब विभाग अपनी ही जमीन को अतिक्रमण से नहीं बचा पा रहा है तो गांव की अन्य सरकारी जमीनों की स्थिति क्या होगी।
ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन पहले उप तहसील की जमीन का सीमांकन कराए, अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करे और सरकारी जमीन को तत्काल कब्जामुक्त कराकर बाउंड्रीवाल का निर्माण कराए।
उप तहसील के पीछे गंदगी, मैदान में खुले में शौच
अतिक्रमण के साथ उप तहसील परिसर की बदहाली भी परेशानी का कारण बनी हुई है। यहां पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है और बारिश व गर्मी से बचाव के लिए भी पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। परिसर में मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे गंदगी बनी रहती है।
उप तहसील के पीछे और आसपास गंदगी के कारण किसान और आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। बचे हुए खुले मैदान में महिलाओं के खुले में शौच जाने की स्थिति भी सामने आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस परिसर में राजस्व संबंधी कामकाज के लिए लोग आते हैं, वहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव गंभीर लापरवाही है।
सड़क पर दुकानें, अतिक्रमण हटाने के बाद फिर वही हाल
अरनिया कलां में अतिक्रमण की समस्या केवल उप तहसील की जमीन तक सीमित नहीं है। आष्टा-शुजालपुर रोड सहित गांव के अंदर कई स्थानों पर दुकानदार सड़क तक सामान रख रहे हैं। इससे सड़क की चौड़ाई कम होने के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी होती है।
कुछ समय पहले प्रशासन ने पुलिस बल के साथ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। उस समय दोबारा कब्जा नहीं करने की चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन नियमित निगरानी नहीं होने से फिर पुराने हालात बन गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि कार्रवाई के बाद लगातार निगरानी और दोबारा कब्जा करने वालों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
प्रस्ताव भेज दिया, फंड मिलते ही कार्रवाई होगी
नायब तहसीलदार शिल्पा सिंह ने कहा कि उप तहसील की जमीन से अतिक्रमण हटाने और बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए एसडीएम को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। प्रस्ताव स्वीकृत होने और फंड मिलने के बाद अतिक्रमण हटाकर बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जाएगा।
अब सवाल यह है कि प्रस्ताव और फंड की प्रक्रिया पूरी होने तक सरकारी जमीन पर हो रहे नए निर्माण को कौन रोकेगा? ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तत्काल मौके पर निरीक्षण कराकर नए निर्माण पर रोक लगाए, ताकि बची हुई सरकारी जमीन भी अतिक्रमण की भेंट न चढ़े।

