संवाददाता-ऐश्वर्य सुमित मिश्रा
केवलारी। मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर केवलारी तहसील के समस्त पटवारी मंगलवार से अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। हड़ताल के प्रथम दिवस पटवारियों ने तहसील कार्यालय परिसर में एकत्रित होकर धरना-प्रदर्शन किया तथा शासन के विरुद्ध शांतिपूर्ण तरीके से अपनी नाराजगी व्यक्त की। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन तहसील प्रशासन को सौंपते हुए वर्षों से लंबित मांगों का शीघ्र निराकरण किए जाने की मांग की।
धरना स्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश पटवारी संघ, केवलारी इकाई के अध्यक्ष गौरव मेश्राम ने कहा कि पटवारी वर्ग प्रदेश शासन की अनेक महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सबसे अग्रिम पंक्ति में कार्य करता है। किसानों से जुड़े राजस्व अभिलेखों का संधारण, फसल गिरदावरी, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, भू-अभिलेखों का अद्यतन, प्राकृतिक आपदाओं का सर्वे, निर्वाचन कार्य, जनगणना, लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव, पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनाव, विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का सत्यापन सहित अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां पटवारियों द्वारा निभाई जाती हैं। इसके बावजूद उनकी सेवा संबंधी समस्याएं लंबे समय से अनसुलझी बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि वेतनमान की विसंगतियां आज भी समाप्त नहीं हुई हैं, जिसके कारण समान प्रकृति का कार्य करने वाले कर्मचारियों के बीच वेतन असमानता बनी हुई है। संघ का कहना है कि इस विषय में कई बार शासन का ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसी प्रकार कैडर रिव्यू का प्रस्ताव लंबे समय से लंबित है, जिससे पटवारियों के पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।
संघ ने मांग की कि कैडर रिव्यू का लंबित प्रस्ताव तत्काल स्वीकृत कर लागू किया जाए, जिससे वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत कर्मचारियों को पदोन्नति का अवसर मिल सके। संघ का कहना है कि अन्य विभागों में नियमित रूप से पदोन्नति की प्रक्रिया संचालित होती है, जबकि पटवारी वर्ग लगातार उपेक्षा का सामना कर रहा है।
पटवारी संघ ने नायब तहसीलदार पद पर पदोन्नति के लिए आयोजित होने वाली विभागीय परीक्षा नियमित रूप से कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि वर्ष 2018 के बाद से विभागीय परीक्षा आयोजित नहीं की गई है, जिसके कारण अनेक पात्र एवं अनुभवी पटवारी पदोन्नति से वंचित हैं। संघ ने शासन से मांग की कि विभागीय परीक्षा का नियमित कैलेंडर जारी किया जाए ताकि पात्र कर्मचारियों के कैरियर पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
धरने के दौरान पटवारियों ने शासकीय कार्यों के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। संघ का कहना है कि राजस्व संबंधी विवादों में कई बार पटवारियों को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। अनेक मामलों में केवल राजस्व प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के बावजूद उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर दी जाती है, जिससे कर्मचारियों में भय एवं असुरक्षा का वातावरण बना रहता है। संघ ने मांग की कि न्यायिक अधिकारियों को प्राप्त कानूनी संरक्षण की तर्ज पर पटवारियों को भी शासकीय कार्यों के दौरान विधिक सुरक्षा प्रदान की जाए, ताकि वे निष्पक्ष एवं निर्भीक होकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।
इसके अतिरिक्त संघ ने फार्मर आईडी, स्वामित्व योजना, भू-सर्वेक्षण एवं अन्य विशेष शासकीय कार्यों के लिए लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान किए जाने की मांग भी की। पटवारियों का कहना है कि इन कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के बावजूद कई कर्मचारियों को अब तक निर्धारित मानदेय प्राप्त नहीं हुआ है।
संघ ने नियमों के विपरीत किए गए तबादलों को निरस्त करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की। उनका कहना है कि स्थानांतरण नीति के विपरीत किए गए आदेशों के कारण कई कर्मचारियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे सभी स्थानांतरण आदेशों की समीक्षा कर न्यायोचित निर्णय लिया जाना चाहिए।

