अमन खान इंकलाबी
राजगढ़,
मध्यप्रदेश में यू,सी,सी, बिल पारित होने के बाद मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने इसका विरोध कर राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर गिरीश कुमार मिश्रा को ज्ञापन दिया।
मध्य प्रदेश के अनेक जिलों में बुधवार को मुस्लिम समुदाय के युवा एवं जैन जी छात्र छात्राओं ने राष्ट्रपति का नाम कलेक्टर को ज्ञापन दिया, राजगढ़ कलेक्टर गिरीश कुमार मिश्रा को सुबह 11:00 बजे कलेक्टर ऑफिस पहुंचकर ज्ञापन दिया गया जिसमें सैयद खुशनुमा ने ज्ञापन का वाचन करते हुए बताया कि
भारत विश्व में एक ऐसा देश है जो विभिन्नताओ में एकता का प्रतिक है यही विशेषता इसके सविधान की जान है लेकिन :
मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026'
धर्म का पालन करने को अपराध मानता है।
कस्टम्स को तो अपवाद की श्रेणी में रखता है। और वहीं अपने धर्म के पालन करने पर दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान रखता है।
21% अनुसूचित जनजाति (ST) आबादी को पूरी तरह से छूट देकर समानता के सिद्धांत का उल्लंघन किया गया है।
हिन्दू विवाह अधिनियम अपने अपने धर्मो का पालन करने वाले समुदायों पर थोपा गया है।
(अनुच्छेद 14): यह अधिकार कानून के समक्ष सभी को समान मानता है। विधेयक द्वारा राज्य की लगभग 21% अनुसूचित जनजाति (ST) आबादी को पूरी तरह से छूट देना और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर इसे अनिवार्य रूप से लागू करना, समानता के सिद्धांत का उल्लंघन है।
(अनुच्छेद 25 और 26): यह प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार देता है। विधेयक द्वारा व्यक्तिगत कानूनों (जैसे निकाह, मेहर, इद्दत, और वसीयत) को विस्थापित करना और धर्म परिवर्तन को तलाक का आधार बनाना इस अधिकार पर सीधा प्रहार है।
(अनुच्छेद 29): यह अनुच्छेद नागरिकों के किसी भी वर्ग को अपनी विशिष्ट संस्कृति संरक्षित करने का अधिकार देता है। विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के पारिवारिक कानूनों को यूसीसी के माध्यम से समरूप करना उनकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को मिटाने का प्रयास है।
संविधान निर्माताओं के अनुसार, समान नागरिक संहिता (अनुच्छेद 44) एक स्वैच्छिक नीति निदेशक तत्व (DPSP) है, जिसे थोपा नहीं जाना चाहिए।
यूसीसी (2026) विधेयक वापस की मांग
नागरिकों के मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 21, 25 और 29) की रक्षा की जाए और बिना सभी प्रभावित पक्षों तथा कानूनी विशेषज्ञों की व्यापक सहमति के व्यक्तिगत कानूनों को विस्थापित न किया जाए। या फिर,
जिस तरह २१% आबादी को कस्टम आधारित छूट दी गई है उसी तरह मुस्लिम्स एवं धर्म निर्देशित समुदायों को अपवाद की श्रेणी में रखा जाए।
संविधान विरोधी बिल
भारत का संविधान हमें धार्मिक स्वतंत्रता की आजादी देता है। मध्य प्रदेश सरकार ने यह कानून पास करके भारत संविधान की धारा अनुच्छेद 25,26 और 29 का उल्लंघन किया है और संविधान को खराब करने की कोशिश की है। इसलिए यह बील संविधान विरोधी है हम इसके खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे।


