Type Here to Get Search Results !

🔴LIVE TV

सिवनी/ बरघाट जनपद सीईओ से कथित अभद्रता का मामला: जनपद अध्यक्ष एवं उनके पति के विरुद्ध जांच और कार्रवाई की मांग : NN81

 



 रिपोर्ट – ऐश्वर्य सुमित मिश्रा

20 जुलाई 2026, सोमवार

जनपद पंचायत कार्यालय में महिला आदिवासी अधिकारी के साथ सार्वजनिक रूप से कथित अपमानजनक व्यवहार का वीडियो वायरल — पंचायतों में सप्लाई, भुगतान और हितों के टकराव की भी उच्चस्तरीय जांच की मांग

सिवनी/बरघाट। बरघाट जनपद पंचायत कार्यालय में पदस्थ आदिवासी महिला जनपद पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती प्रतिभा परते के साथ जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती आभा राहंगडाले, उनके पति जितेन्द्र राहंगडाले एवं एक अन्य व्यक्ति द्वारा कथित रूप से सार्वजनिक रूप से अभद्र व्यवहार किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। वीडियो में कार्यालयीन कार्य के दौरान रिकॉर्डिंग को लेकर विवाद और अधिकारी तथा जनपद अध्यक्ष के बीच तीखी बहस दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। इस पूरे मामले को लेकर अब शासन-प्रशासन से निष्पक्ष जांच, दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई तथा पंचायतों में किए गए कथित सप्लाई कार्यों और भुगतानों की विस्तृत जांच की मांग उठने लगी है।

स्थानांतरण के बाद भी नए अधिकारी के कार्यभार ग्रहण नहीं करने से वर्तमान सीईओ कर रहीं कार्य ;

बताया गया है कि जनपद पंचायत बरघाट की वर्तमान सीईओ श्रीमती प्रतिभा परते का स्थानांतरण हो चुका है, लेकिन उनके स्थान पर पदस्थ किए गए नए अधिकारी द्वारा अभी तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में श्रीमती परते द्वारा कार्यालयीन दायित्वों का निर्वहन किया जा रहा है। इसी दौरान जनपद पंचायत अध्यक्ष द्वारा अपने पति एवं एक अन्य व्यक्ति के साथ कार्यालय पहुंचकर वीडियो रिकॉर्डिंग कराए जाने को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। वायरल वीडियो में सीईओ द्वारा कार्यालय के अंदर रिकॉर्डिंग पर आपत्ति जताते हुए रिकॉर्डिंग बंद करने की बात कहे जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस होती दिखाई दे रही है

वीडियो में जनपद अध्यक्ष द्वारा सीईओ को उंगली दिखाकर बातचीत करने और कथित रूप से ऊंची आवाज में बहस करने के दृश्य भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि किया जाना अभी शेष है।

क्या जनपद अध्यक्ष को अधिकारी के साथ इस तरह व्यवहार करने का अधिकार है? :

पंचायती राज व्यवस्था में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और शासकीय अधिकारियों की अपनी-अपनी वैधानिक भूमिकाएं निर्धारित हैं। किसी भी जनप्रतिनिधि को शासकीय कार्यालय में पदस्थ अधिकारी के साथ सार्वजनिक रूप से अपमानजनक या अभद्र व्यवहार करने का अधिकार नहीं है। यदि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की पुष्टि जांच में होती है, तो शासन को यह देखना होगा कि क्या संबंधित आचरण शासकीय कार्य में बाधा, शासकीय अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार अथवा अन्य किसी वैधानिक प्रावधान के अंतर्गत कार्रवाई योग्य है।

पंचायतों में सप्लाई और भुगतान की भी जांच की मांग :

इस पूरे विवाद के साथ ही जनपद पंचायत बरघाट क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में होने वाले विभिन्न विकास कार्यों और खरीदी में जनपद अध्यक्ष के पति श्री जितेन्द्र राहंगडाले तथा उनसे जुड़े व्यक्तियों अथवा परिजनों की फर्मों की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

आरोप है कि जनपद क्षेत्र की कुछ ग्राम पंचायतों में सोलर लाइट, सोलर प्लेट सहित अन्य सामग्री की सप्लाई से जुड़े कार्यों में उनके द्वारा अथवा उनसे जुड़े प्रतिष्ठानों के माध्यम से सामग्री उपलब्ध कराई गई। कुछ मामलों में सामग्री की पूर्ण आपूर्ति के बिना भुगतान किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।

इसी प्रकार आष्टा पंचायत से संबंधित सामग्री आपूर्ति को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कथित रूप से आज दिनांक तक पूरी सप्लाई नहीं हुई है, जबकि भुगतान प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं। इन सभी आरोपों की वास्तविकता दस्तावेजों, बिल, वाउचर, स्टॉक रजिस्टर, जीएसटी अभिलेख, पंचायत प्रस्ताव और भौतिक सत्यापन के आधार पर ही स्पष्ट हो सकती है।

जनपद पंचायत कार्यालय में टाइल्स के भुगतान की भी जांच जरूरी : 

बरघाट जनपद पंचायत कार्यालय में लगाए गए चेकर टाइल्स के कार्य को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि जिस कार्य की वास्तविक लागत लगभग एक लाख रुपये के आसपास होने का दावा किया जा रहा है, उसके लिए लगभग पांच लाख रुपये का भुगतान किए जाने की बात सामने आई है।

बताया जा रहा है कि उक्त कार्य जनपद पंचायत अध्यक्ष के पति एवं पूर्व रोजगार सहायक जितेन्द्र राहंगडाले से जुड़े होने के आरोप हैं। हालांकि, इस मामले में भी वास्तविक स्थिति स्वीकृत अनुमान, निविदा/कोटेशन प्रक्रिया, कार्यादेश, माप पुस्तिका, बिल, भुगतान अभिलेख और मौके के भौतिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

हितों के टकराव और पंचायत अधिनियम के प्रावधानों के तहत हो जांच :

पंचायती राज व्यवस्था में निर्वाचित पदाधिकारियों, उनके निकट संबंधियों और उनसे जुड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की पंचायतों में होने वाली खरीदी एवं निर्माण कार्यों में भूमिका को लेकर पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है। यदि किसी जनप्रतिनिधि के पति, परिजन या उनसे सीधे जुड़े प्रतिष्ठान ग्राम पंचायतों में सप्लाई या निर्माण कार्य कर रहे हैं, तो इस बात की जांच आवश्यक है कि कहीं संबंधित प्रकरणों में हितों का टकराव, प्रभाव का दुरुपयोग, नियमों की अनदेखी अथवा पंचायत निधि के उपयोग में अनियमितता तो नहीं हुई।

सिवनी कलेक्टर नेहा मीना और जिला पंचायत सीईओ से उच्चस्तरीय जांच की मांग :

मामले में मांग की जा रही है कि सिवनी कलेक्टर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा स्वतंत्र जांच दल गठित कर निम्न बिंदुओं की जांच कराई जाए—

- जनपद पंचायत कार्यालय में महिला आदिवासी सीईओ के साथ कथित अभद्रता और वायरल वीडियो की सत्यता।

- घटना के दौरान शासकीय कार्य में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न हुई या नहीं।

- जनपद पंचायत अध्यक्ष एवं उनके पति से जुड़े व्यक्तियों/फर्मों द्वारा ग्राम पंचायतों में की गई कथित सप्लाई की जांच।

- सोलर लाइट, सोलर प्लेट एवं अन्य सामग्री की वास्तविक आपूर्ति और भुगतान का भौतिक सत्यापन।

- आष्टा पंचायत सहित अन्य पंचायतों में कथित अधूरी सप्लाई के बावजूद भुगतान की जांच।

- जनपद पंचायत कार्यालय में चेकर टाइल्स के कार्य की स्वीकृत लागत, वास्तविक लागत और भुगतान की जांच।

- संबंधित फर्मों के स्वामित्व, संचालकों और जनपद अध्यक्ष के परिवार से संबंधों की जांच।

- निविदा, कोटेशन, पंचायत प्रस्ताव, बिल, वाउचर, जीएसटी, स्टॉक रजिस्टर एवं भुगतान अभिलेखों का परीक्षण।

- यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित हो तो संबंधितों से राशि की वसूली और नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई।

एफआईआर से पहले निष्पक्ष जांच आवश्यक, लेकिन कानून सभी के लिए समान हो

यदि जनपद पंचायत सीईओ द्वारा घटना के संबंध में पुलिस में शिकायत की जाती है, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि क्या शासकीय अधिकारी को ऐसी कार्रवाई के लिए कलेक्टर या जिला पंचायत सीईओ से किसी पूर्व अनुमति की आवश्यकता है अथवा वे स्वयं अपने अधिकार क्षेत्र में शिकायत दर्ज करा सकती हैं। इस संबंध में प्रशासन और पुलिस को स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए। साथ ही, यदि जांच में किसी भी पक्ष द्वारा कानून का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो कार्रवाई बिना किसी राजनीतिक या पदगत दबाव के की जानी चाहिए।

आदिवासी महिला अधिकारी के सम्मान का सवाल

एक ओर सरकार आदिवासी समाज के उत्थान, सम्मान और सशक्तिकरण की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर यदि किसी आदिवासी महिला शासकीय अधिकारी के साथ सार्वजनिक रूप से अपमानजनक व्यवहार किए जाने की पुष्टि होती है, तो यह गंभीर विषय है। इसलिए शासन-प्रशासन को मामले को राजनीतिक विवाद के रूप में नहीं, बल्कि महिला अधिकारी के सम्मान, शासकीय कार्य की गरिमा और पंचायतों में वित्तीय पारदर्शिता के मुद्दे के रूप में देखना चाहिए। मांग है कि वायरल वीडियो और पंचायतों में हुए कथित भुगतान एवं सप्लाई कार्यों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाई जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध पंचायत अधिनियम, वित्तीय नियमों एवं लागू वैधानिक प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Advertisement

#codes