रिपोर्ट :-देवजीत देवनाथ
पखांजूर :-स्टेट हाईवे-25 पर मंडराया बड़ा खतरा! अंजलि नाले के पुल में दरारें, 70 साल पुराने पुलों पर दौड़ेंगे माइंस के भारी वाहन तो कट सकता है 500 गांवों का संपर्क
पखांजूर। परलकोट इलाके की जीवनरेखा मानी जाने वाली स्टेट हाईवे क्रमांक-25 की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में गंभीर चिंता व्याप्त है। सुरजागढ़ माइंस से प्रस्तावित भारी-भरकम वाहनों के इस मार्ग से संचालन की संभावना के बीच लोगों ने सड़क और पुलों की मजबूती पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से तत्काल तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो बरसात के मौसम में पूरे परलकोट क्षेत्र के लिए गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
परलकोट क्षेत्र के लगभग 500 गांवों को जिला मुख्यालय और अन्य प्रमुख शहरों से जोड़ने वाली स्टेट हाईवे क्रमांक-25 इस पूरे इलाके की एकमात्र मुख्य सड़क है। स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, कृषि उपज का परिवहन, व्यापार, रोजगार, सरकारी योजनाओं का संचालन और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पूरी तरह इसी मार्ग पर निर्भर है। ऐसे में इस सड़क को कोई भी नुकसान हजारों लोगों के जनजीवन को प्रभावित कर सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस हाईवे पर बने अधिकांश माइनर ब्रिज करीब 70 वर्ष पुराने हैं। समय के साथ इन पुलों की स्थिति कमजोर होती गई है, लेकिन अब तक इनकी व्यापक तकनीकी जांच या मजबूतीकरण नहीं कराया गया है। सबसे अधिक चिंता अंजलि नाले पर बने पुल को लेकर जताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार इस पुल में कई स्थानों पर दरारें दिखाई दे रही हैं, जिससे इसकी सुरक्षा और भार वहन क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि पहले से क्षतिग्रस्त पुल पर लगातार भारी-भरकम माइंस वाहनों का आवागमन शुरू हो गया, तो पुल को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है और किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सुरजागढ़ माइंस से निकलने वाले भारी वाहनों का वजन सामान्य मालवाहक वाहनों की तुलना में कहीं अधिक होता है। ऐसे वाहनों का लगातार आवागमन पुराने पुलों और सड़क की संरचना पर अतिरिक्त दबाव डालेगा। यदि किसी पुल में दरार बढ़ती है या वह क्षतिग्रस्त होता है, तो बरसात के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
चिंता का विषय यह भी है कि स्टेट हाईवे-25 का फिलहाल कोई प्रभावी वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं है। यदि किसी कारणवश अंजलि नाले का पुल या अन्य कोई पुल क्षतिग्रस्त होता है अथवा सड़क बंद होती है, तो परलकोट क्षेत्र के सैकड़ों गांवों का जिला मुख्यालय और अन्य आवश्यक सेवाओं से संपर्क पूरी तरह टूट सकता है। ऐसी स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भारी परेशानी होगी, विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होगी, किसानों की उपज बाजार तक नहीं पहुंच पाएगी, व्यापारिक गतिविधियां ठप पड़ सकती हैं और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी बाधित हो जाएगी।
स्थानीय लोगों और क्षेत्र के जानकारों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि स्टेट हाईवे-25 पर स्थित सभी पुराने पुलों, विशेष रूप से अंजलि नाले के पुल की विशेषज्ञों से विस्तृत तकनीकी जांच कराई जाए। पुलों और सड़क की भार वहन क्षमता का वैज्ञानिक परीक्षण होने तक सुरजागढ़ माइंस के भारी-भरकम वाहनों के संचालन की अनुमति नहीं दी जाए अथवा उनके लिए अलग वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराया जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन स्थानीय लोगों की इस गंभीर चिंता को समय रहते समझेगा और किसी संभावित हादसे से पहले आवश्यक कदम उठाएगा, या फिर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही व्यवस्था जागेगी। पूरे परलकोट क्षेत्र की नजर अब शासन-प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।

