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ममता का अपमान और विश्वासघात: जिस बेसहारा आदिवासी महिला ने कभी अपनी छाती से लगाकर पाला-पोसा, आज उसी मूक-बाधिर बुजुर्ग की जमीन हड़पने का कुत्सित प्रयास! : NN81

 

सिवनी में आदिवासी महिला की जमीन का रहस्य: पर्दे के पीछे के चेहरों से उठेगा नकाब!

 ममता का अपमान और विश्वासघात: जिस बेसहारा आदिवासी महिला ने कभी अपनी छाती से लगाकर पाला-पोसा, आज उसी मूक-बाधिर बुजुर्ग की जमीन हड़पने का कुत्सित प्रयास!

 राजेश खुटाफले और अजय की संदिग्ध भूमिका: खुद को 'पंडित' कहलवाने वाले महाराष्ट्रीयन कसेरों समाज के राजेश खुटाफले और आमाझिरिया निवासी अजय की संलिप्तता पर खड़े होते गंभीर सवाल!

 ₹10,000 में कलम खरीदने का दुस्साहस: पत्रकार मोहित यादव को रिश्वत देकर सच का गला घोंटने की नापाक कोशिश—स्पष्ट संदेश, बिकाऊ नहीं है निष्पक्ष पत्रकारिता!

दिव्यांगता और लाचारी का सौदा: आंखों से अंधी और सुनने में असमर्थ महिला की फर्जी सहमति तैयार कर रातों-रात जमीन के कागजात बदलने वाले शातिर भू-माफियाओं का पर्दाफाश!

सिवनी जिले के ग्राम इंदावाड़ी और कुरई के पास मोहगांव से सामने आया यह प्रकरण केवल एक साधारण भूमि विवाद नहीं है, बल्कि यह इंसानियत, संवेदना और कानून की धज्जियां उड़ाने वाला एक गंभीर आपराधिक षड्यंत्र है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में वन विभाग के पूर्व कर्मचारी के पुत्र राजेश खुटाफले की संदेहास्पद भूमिका पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। जिस महिला के घर में कभी राजेश का परिवार आश्रय पाता था और जिस ममतामयी आदिवासी महिला ने इन बच्चों को अपने आंचल की छांव में पाला, आज उसी के आशियाने और पुश्तैनी जमीन पर कब्जा करने का नापाक खेल खेला गया है।इस भ्रष्टाचार की पटकथा बेहद शातिर तरीके से रची गई, जिसमें पीड़ित आदिवासी महिला की शारीरिक और मानसिक विवशता का बेरहमी से फायदा उठाया गया। वह बुजुर्ग महिला न तो ठीक से देख सकती है, न सुन सकती है और मानसिक रूप से भी गंभीर रूप से अस्वस्थ है। ऐसी असहाय और मूक-बाधिर महिला की सुध लेने वाला जब कोई नहीं था, तो उसकी इसी कमजोरी का लाभ उठाकर पहले जमीन को एक अनुसूचित जाति के व्यक्ति के नाम और फिर सुनियोजित साजिश के तहत ग्राम आमाझिरिया निवासी अजय के नाम पर रजिस्टर्ड करवा दिया गयाआखिर यह सवाल अपनी जगह गंभीर है कि जिस महिला को अपने अंगूठे के निशान या हस्ताक्षर की सुधि तक नहीं, उसकी 'स्वतंत्र सहमति' का यह फर्जी ड्रामा किसके इशारे पर रचा गया? क्या उप-पंजीयक कार्यालय के भ्रष्ट तंत्र की मिलीभगत के बिना यह खेल संभव था?

जब इस सनसनीखेज मामले की भनक पत्रकार मोहित यादव को लगी और उन्होंने इस काले सच को जनता के सामने लाने का बीड़ा उठाया, तो इस शातिर सिंडिकेट के पांव तले जमीन खिसक गई। अपनी पोल खुलने के डर से इस गिरोह ने पत्रकारिता को ही खरीदने की घिनौनी कोशिश शुरू कर दी। मोहित यादव को ₹10,000 की रिश्वत का लालच देकर इस सुलगती हुई खबर को दबाने का कुत्सित प्रयास किया गया। यह इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि इस पूरे खेल के पीछे गहरे और शातिर दिमाग काम कर रहे हैं। हालांकि, पत्रकार मोहित यादव ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि उनकी कलम और जमीर न तो किसी के दबाव में झुकेगा और न ही चंद सिक्कों में बिकेगा।

*सख्त कानूनी धाराओं के तहत होगी कार्रवाई* इस हाई-प्रोफाइल जमीन घोटाले में केवल मानवीय मूल्यों का पतन ही नहीं हुआ है, बल्कि देश के संविधान और कानूनों की भी सरेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं। इस गंभीर प्रकरण में निम्नलिखित कानूनी प्रावधानों के तहत तत्काल और कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है:

 *भारतीय संविधान के अनुच्छेद 46 का खुला उल्लंघन*: यह प्रावधान राज्य को अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के कमजोर वर्गों के आर्थिक हितों की रक्षा करने और उन्हें किसी भी प्रकार के शोषण व सामाजिक अन्याय से बचाने का स्पष्ट आदेश देता है, जिसकी इस मामले में पूरी तरह अवहेलना की गई है।

 *मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 165(6)*: इस अनिवार्य विधिक धारा के तहत आदिवासियों की जमीन के हस्तांतरण पर अत्यंत कड़े प्रतिबंध हैं। बिना सक्षम प्राधिकारी (कलेक्टर) की पूर्व अनुमति और विधिवत संवीक्षा के किसी आदिवासी की जमीन गैर-आदिवासी या अन्य व्यक्तियों को हस्तांतरित नहीं की जा सकती। यदि नियमों को ताक पर रखकर यह रजिस्ट्री कराई गई है, तो यह सीधा संज्ञेय अपराध है।

 *भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराएं (धोखाधड़ी और कूटसाक्ष्य)*: एक दिव्यांग, मूक-बाधिर और बेसहारा महिला की लाचारी का फायदा उठाकर धोखाधड़ी करना, फर्जी दस्तावेज तैयार करना और संपत्ति हड़पने का आपराधिक षड्यंत्र रचना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जिसके तहत राजेश खुटाफले, अजय और अन्य संलिप्त किरदारों पर तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज होनी चाहिए।

 *भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की प्रासंगिक धाराएं*: पत्रकार को खबर दबाने के एवज में ₹10,000 की पेशकश करने के इस कुकृत्य की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि इस सिंडिकेट के हर एक चेहरे को बेनकाब किया जा सके।पत्रकार मोहित यादव ने इस अवैध और फर्जी रजिस्ट्री को सक्षम न्यायालय के माध्यम से शून्य घोषित करवाने और जमीन के असली हकदार को उसका वैध अधिकार वापस दिलाने के लिए पूरी कानूनी लड़ाई लड़ने का दृढ़ संकल्प लिया है। अब गेंद जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और पुलिस के पाले में है कि वे इस संवेदनशील मामले में कितनी निष्पक्षता और त्वरित सख्ती दिखाते हैं। यदि इस मामले में शीघ्र ही कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह भू-माफियाओं के हौसले और अधिक बुलंद कर देगा!


लोकेशन - सिवनी 

संवाददाता मोहित यादव 


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