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_मौत के बाद हर इंसान को दो गज जमीन तक पहुंचने का हक है,लेकिन नोरोज़ाबाद से सटे ग्राम कंचनपुर में यह आखिरी सफर भी किसी इम्तिहान से कम नही : NN81

 


 रिपोर्टर : मदनलाल बर्मन 

_मौत के बाद हर इंसान को दो गज जमीन तक पहुंचने का हक है,लेकिन नोरोज़ाबाद से सटे ग्राम कंचनपुर में यह आखिरी सफर भी किसी इम्तिहान से कम नही।

_मंगलवार को कंचनपुर के पीपल चौक के पास रहने वाले मुजीबुर्रहमान का हार्ट अटैक से निधन हो गया। बुधवार को उन्हें गांव के उस कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया,जो नदी की दूसरी ओर स्थित है।जनाजा कब्रिस्तान तक पहुंचाने के लिए लोगों को करीब 4 से 5 फीट गहरी नदी की धार पार करनी पड़ी।शव को पानी के बीच से लेकर गुजरना जोखिम भरा था।तेज बहाव और गहराई के कारण बड़ी संख्या में लोग चाहकर भी नदी पार करने की हिम्मत नहीं जुटा सके और आखिरी मिट्टी में शामिल होने से महरूम रह गए।यह दृश्य सिर्फ एक परिवार की मजबूरी नहीं,बल्कि व्यवस्था के सामने खड़ा बड़ा सवाल भी है कि आखिर किसी इंसान के आखिरी सफर के लिए भी सुरक्षित रास्ता क्यों नहीं?स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी पर रपटा या सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की मांग कई बार प्रशासन से की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।_

इसी तरह उमरिया मुख्यालय के ज्वालामुखी टोला में भी मरघटी नदी के दूसरी ओर श्मशान घाट होने के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हाल ही में अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाते समय तेज बहाव में शव दो बार नदी में बह गया।परिजनों की तत्परता से उसे तत्काल पकड़ लिया गया,जिसके बाद अंतिम संस्कार हो सका।ज्वालामुखी श्मशान घाट तक सुरक्षित पहुंच मार्ग के लिए महिला वार्ड पार्षद विनीता संजय तिवारी और सविता सोंधिया ने नगरपालिका से जल्द रपटा सहित आवश्यक व्यवस्था कराने की मांग की है।कंचनपुर और ज्वालामुखी की तस्वीरें देख एक सवाल ज़रूर सामने खड़ा है कि क्या आखिरी सफर को सुरक्षित बनाने के लिए भी अब किसी हादसे का इंतजार करना पड़ेगा?

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