संवादाता : विष्णु बैरागी
चौरवासा:- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर शुक्रवार को नगर चौरवासा पूरी तरह कृष्णमय नजर आया। मंदिरों में दिनभर विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और श्रृंगार के आयोजन हुए, वहीं शाम ढलते ही मंदिरों और गलियों में कृष्ण-कन्हैया के भजनों की गूंज सुनाई देने लगी। मध्यरात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही मंदिरों में महाआरती हुई और श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ जन्मोत्सव मनाया। दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए देर रात तक हजारों श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचते रहे।
नगर के रियासतकालीन ठाकुर श्री राम एवं कृष्ण मंदिर में जन्माष्टमी को लेकर विशेष आयोजन किया गया। भगवान ठाकुरजी का पंचामृत से अभिषेक कर मनमोहक श्रृंगार किया गया। मंदिर परिसर में आकर्षक विद्युत सजावट की गई , जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। मंदिर में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मध्यरात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के अवसर पर महाआरती की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं को धनिये की पंजीरी सहित प्रसाद वितरित किया गया।
जन्माष्टमी के अवसर पर नगर के प्रमुख मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया। भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमाओं को सुंदर वस्त्र पहनाकर विशेष श्रृंगार किया गया तथा फूलों और रंग-बिरंगी लाइटिंग से मंदिरों को भव्य रूप दिया गया। अन्य धार्मिक स्थलों पर विशेष साज-सज्जा की गई।
मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण की 10 सजीव झांकियों का सुंदर चित्रण किया गया, जिन्हें देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। घर-घर में भी भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमाओं का श्रृंगार कर आकर्षक झांकियां सजाईं।
शाम होते ही नगर के मंदिरों में भजन-कीर्तन का दौर शुरू हो गया राम मंदिर में विभिन्न भजन मंडलियों ने भगवान श्रीकृष्ण के मधुर भजनों की प्रस्तुतियां दीं, जिन पर श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। रात 12 बजे जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की घोषणा हुई, मंदिरों में ‘नंद के घर आनंद भयो’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारे गूंज उठे।मध्यरात्रि जन्मोत्सव के बाद महाआरती एवं प्रसाद वितरण हुआ।

