महीनों से पानी को तरस रहा जनपद मुख्यालय का वार्ड, शिकायतों के बाद भी नहीं जागा प्रशासन : NN81
डिंडौरी/समनापुर। जनपद पंचायत समनापुर मुख्यालय के वार्ड में पिछले करीब एक महीने से पेयजल संकट गहराया हुआ है। नल में पानी नहीं आने से वार्डवासी बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या को लेकर वे कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत और निवेदन कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद पेयजल व्यवस्था बहाल करने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई
बताया जा रहा है कि पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण वार्ड में पानी की सप्लाई लंबे समय से प्रभावित है। ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को लगातार दी जाती रही, लेकिन मरम्मत के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिलता रहा। जब बार-बार शिकायत के बाद भी नलों में पानी नहीं पहुंचा तो ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया
शिकायतें होती रहीं, अधिकारी नहीं जागे
ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए उन्हें लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़े। कई बार समस्या के समाधान की मांग की गई, लेकिन जिम्मेदारों द्वारा समय रहते कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि जनपद पंचायत के सीईओ रोहित उपाध्याय के संज्ञान में मामला होने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं कराया गया
ग्रामीणों का सवाल है कि जब जनपद पंचायत मुख्यालय के वार्ड में ही एक महीने से पानी की समस्या बनी हुई है और शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, तो दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था की निगरानी किस तरह की जा रही होगी?
आखिर तालाबंदी की नौबत क्यों आई
लगातार पानी की समस्या और अधिकारियों की कथित उदासीनता से नाराज ग्रामीण जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने अपना आक्रोश जताते हुए जनपद पंचायत मुख्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया।
ग्रामीणों की मांग है कि क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की तत्काल मरम्मत कराकर पानी की सप्लाई शुरू की जाए। साथ ही यह भी जांच हो कि शिकायतों के बावजूद इतने दिनों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई और पेयजल संकट के लिए जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई
सीईओ की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
पेयजल संकट को लेकर अब जनपद पंचायत के सीईओ रोहित उपाध्याय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब समस्या बार-बार बताई गई तो समाधान क्यों नहीं हुआ
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने की जानकारी जिम्मेदारों को होने के बावजूद उसकी मरम्मत में इतना समय क्यों लगा? क्या अधिकारियों ने मौके पर जाकर स्थिति की जांच की यदि जांच की गई तो अब तक पाइपलाइन दुरुस्त क्यों नहीं हुई? और यदि शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है
तालाबंदी के बाद जागेगा प्रशासन या फिर मिलेगा आश्वासन
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें आंदोलन करने का कोई शौक नहीं है, लेकिन जब मूलभूत सुविधा के लिए भी महीनों तक सुनवाई नहीं होती तो मजबूर होकर विरोध का रास्ता अपनाना पड़ता है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पेयजल व्यवस्था बहाल नहीं की गई और पाइपलाइन की स्थायी मरम्मत नहीं कराई गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
अब देखना यह है कि जनपद मुख्यालय के गेट पर हुई तालाबंदी के बाद प्रशासन ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए ठोस कदम उठाता है या फिर मामला एक बार फिर आश्वासन तक ही सीमित रह जाता है।

