गोंडी भाषा के संरक्षण की मुहिम में जुटे भीमराज शोरी, सोशल मीडिया पर बना रहे नई पहचान :
कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के विकासखंड माकड़ी के ग्राम लुभा नया पारा के युवा भीमराज शोरी अपनी प्रतिभा और जुनून के दम पर गोंडी भाषा को सोशल मीडिया के माध्यम से नई पहचान दिलाने में जुटे हैं। आदिवासी किसान परिवार में जन्मे भीमराज आज गोंडी भाषा में मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता से जुड़े वीडियो बनाकर लोगों तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं।
15 अप्रैल 1997 को जन्मे भीमराज शोरी ने सोशल मीडिया के क्षेत्र में कदम रखते हुए 10 नवंबर 2022 को “Bhima Gondi Vlogs” नाम से अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया। शुरुआत में सोशल मीडिया और यूट्यूब की तकनीकी जानकारी कम होने के कारण वे चैनल पर लगातार काम नहीं कर सके। हालांकि, उन्होंने प्रयास करना नहीं छोड़ा।
इसके बाद उन्होंने इंस्टाग्राम पर “bhimshori_07” नाम से अकाउंट बनाया और गोंडी भाषा में वीडियो बनाकर लोगों तक पहुंचाना शुरू किया। उनके वीडियो में गोंडी भाषा, स्थानीय संस्कृति, हास्य-व्यंग्य और सामाजिक जागरूकता जैसे विषय देखने को मिलते हैं। धीरे-धीरे उनके कंटेंट को लोगों का समर्थन मिलने लगा और उनकी प्रतिभा लोगों के सामने आने लगी।
आज उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 10.6 हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक लोग उनके गोंडी भाषा में बनाए गए वीडियो को पसंद कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर मिल रहे इस समर्थन ने भीमराज के आत्मविश्वास को और मजबूत किया।
जंगल बचाने का दिया संदेश
लोगों से मिल रहे उत्साह के बाद भीमराज ने अपने यूट्यूब चैनल पर भी दोबारा सक्रिय होकर काम शुरू किया। 14 मार्च 2025 को उन्होंने गोंडी भाषा में जंगलों को आग से बचाने और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा वीडियो अपलोड किया। इस वीडियो को दर्शकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली और कुछ ही समय में करीब 2 हजार लोगों ने इसे देखा।
वीडियो पर लाइक और सकारात्मक कमेंट आने के बाद उनके यूट्यूब चैनल को भी नई गति मिली। करीब एक महीने में चैनल के सब्सक्राइबर बढ़कर 2.3 हजार के आसपास पहुंच गए। इस प्रतिक्रिया से उत्साहित होकर भीमराज ने गोंडी भाषा में लगातार वीडियो बनाने का निर्णय लिया।
भाषा और संस्कृति को बचाने का संकल्प
भीमराज शोरी का कहना है कि सोशल मीडिया उनके लिए केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि अपनी भाषा और संस्कृति को लोगों तक पहुंचाने का एक मजबूत मंच है। उनका उद्देश्य गोंडी भाषा को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना और नई पीढ़ी को अपनी भाषा एवं संस्कृति से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि गोंडी भाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए वे आगे भी लगातार गोंडी भाषा में वीडियो बनाते रहेंगे। साथ ही बाहरी पलायन, पर्यावरण संरक्षण और अन्य सामाजिक विषयों पर भी लोगों को जागरूक करने का प्रयास करेंगे।
परिवार और टीम का मिल रहा सहयोग
भीमराज के इस सफर में उनके परिवार और साथियों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने बताया कि उनके बड़े भाई सूरज शोरी ने सबसे पहले उन्हें प्रोत्साहित किया और उनका साथ दिया।
उनकी टीम में गजानंद मरकाम (वीडियो एडिटर), लकी लाल मरकाम, मनोज नेताम, ललित मरकाम, सरादू नेताम, रोहित नेताम, पिंकी शोरी, प्रदीप शोरी, वीरेंद्र मरकाम, अज्जू मरकाम, सविता मरकाम, संजय मरकाम, प्रमिला नेताम और सियाराम नेताम शामिल हैं।
भीमराज शोरी की कहानी यह बताती है कि यदि स्थानीय भाषा, संस्कृति और प्रतिभा को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाए तो गांव के युवा भी बड़े स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। गोंडी भाषा को सोशल मीडिया के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का उनका प्रयास युवाओं के लिए प्रेरणादायक बनता जा रहा है।

