“भारतीय बॉक्सिंग अब सिर्फ पदक जीतने नहीं, दुनिया पर दबदबा बनाने की राह पर है - प्रमोद कुमार
झांसी।भारतीय मुक्केबाजी ने हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। कॉमनवेल्थ से लेकर विश्व चैंपियनशिप तक, भारतीय बॉक्सर्स ने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है। इसी पृष्ठभूमि में बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव प्रमोद कुमार से खेल विश्लेषक बृजेंद्र यादव की यह खास बातचीत भारतीय बॉक्सिंग के वर्तमान और भविष्य की दिशा को समझने का प्रयास है।
खेल विश्लेषक बृजेंद्र यादव : कॉमनवेल्थ खेलों में भारतीय मुक्केबाजों के प्रदर्शन को आप किस नजरिए से देखते हैं? क्या यह भारतीय बॉक्सिंग के नए दौर की शुरुआत है?
प्रमोद कुमार : निश्चित रूप से। भारतीय मुक्केबाजी ने यह साबित किया है कि हमारे पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। कॉमनवेल्थ में खिलाड़ियों का प्रदर्शन मेहनत, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और सही दिशा में किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है। अब हमारा लक्ष्य केवल पदक जीतना नहीं, बल्कि विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक में लगातार शीर्ष पर रहना है।
बृजेंद्र यादव : लेकिन सवाल यह है कि कॉमनवेल्थ के पदकों को हम ओलंपिक सफलता में कैसे बदलेंगे?
प्रमोद कुमार : यही सबसे बड़ी चुनौती है। कॉमनवेल्थ और ओलंपिक की प्रतिस्पर्धा में काफी अंतर है। इसलिए हम खिलाड़ियों को सिर्फ प्रतियोगिता के लिए तैयार नहीं कर रहे, बल्कि चार साल की दीर्घकालिक योजना पर काम कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर, उच्च स्तरीय स्पैरिंग, फिटनेस, खेल विज्ञान और मानसिक मजबूती—इन सभी पहलुओं को एक साथ लेकर चलना होगा।
बृजेंद्र यादव : भारतीय बॉक्सिंग में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, फिर भी कई बार बड़े मंच पर दबाव में प्रदर्शन प्रभावित होता है। क्या मानसिक तैयारी पर पर्याप्त काम हो रहा है?
प्रमोद कुमार : बिल्कुल। आधुनिक बॉक्सिंग में केवल ताकत और तकनीक से मुकाबला नहीं जीता जा सकता। मानसिक मजबूती उतनी ही महत्वपूर्ण है। हम खिलाड़ियों के साथ स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट और विशेषज्ञों की मदद ले रहे हैं। खिलाड़ी को यह विश्वास होना चाहिए कि वह दुनिया के किसी भी मुक्केबाज को हरा सकता है।
बृजेंद्र यादव : चयन प्रक्रिया को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। क्या फेडरेशन चयन में पारदर्शिता को लेकर कोई नई व्यवस्था कर रहा है?
प्रमोद कुमार : हमारी कोशिश हमेशा यही रहती है कि चयन योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर हो। खिलाड़ी को यह भरोसा होना चाहिए कि रिंग में उसका प्रदर्शन ही उसकी सबसे बड़ी पहचान है। चयन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी तथा प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं।
बृजेंद्र यादव : घरेलू स्तर पर कई प्रतिभाएं संसाधनों के अभाव में पीछे रह जाती हैं। उन खिलाड़ियों तक फेडरेशन कैसे पहुंचेगा?
प्रमोद कुमार : यह बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। हमारी प्राथमिकता महानगरों के अलावा छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिभाओं को तलाशना है। भारत के छोटे-छोटे कस्बों में ऐसे मुक्केबाज हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की क्षमता है। हमें उन्हें सही मंच, प्रशिक्षण और प्रतियोगिता देनी होगी।
बृजेंद्र यादव : क्या आपको लगता है कि राज्यों की बॉक्सिंग व्यवस्था को और मजबूत किए बिना भारत विश्व की नंबर एक बॉक्सिंग ताकत बन सकता है?
प्रमोद कुमार : नहीं। राष्ट्रीय टीम की सफलता की नींव राज्यों में तैयार होती है। इसलिए राज्य संघों, अकादमियों और प्रशिक्षकों को मजबूत करना बेहद जरूरी है। हमें जमीनी स्तर पर ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जहां प्रतिभा की पहचान कम उम्र में हो और उसका व्यवस्थित विकास किया जाए।
बृजेंद्र यादव : कोचिंग को लेकर भी कई बार चर्चा होती है। क्या भारतीय कोच अंतरराष्ट्रीय स्तर की आधुनिक बॉक्सिंग के साथ कदमताल कर पा रहे हैं?
प्रमोद कुमार : भारतीय कोचों में प्रतिभा और अनुभव दोनों हैं। लेकिन खेल लगातार बदल रहा है। इसलिए कोचों का भी अपग्रेडेशन जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और खेल विज्ञान की जानकारी को भारतीय कोचिंग सिस्टम में शामिल करना हमारी प्राथमिकता है।
बृजेंद्र यादव : क्या फेडरेशन खिलाड़ियों पर पदक का दबाव कम करने की दिशा में भी काम कर रहा है?
प्रमोद कुमार : खिलाड़ी को पदक जीतने की भूख होनी चाहिए, लेकिन अनावश्यक दबाव नहीं। हमारा काम उसे ऐसी परिस्थितियां देना है जिसमें वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सके। हम चाहते हैं कि खिलाड़ी परिणाम से ज्यादा अपनी प्रक्रिया और प्रदर्शन पर ध्यान दे।
बृजेंद्र यादव : भारतीय महिला बॉक्सिंग ने दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। क्या आपको लगता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं का प्रदर्शन अब ज्यादा प्रभावशाली हो रहा है?
प्रमोद कुमार : भारतीय महिला बॉक्सिंग ने वास्तव में शानदार प्रगति की है। लेकिन मैं पुरुष और महिला बॉक्सिंग की तुलना नहीं करूंगा। दोनों वर्गों में हमारे पास बेहतरीन प्रतिभाएं हैं। हमारा लक्ष्य दोनों वर्गों को समान अवसर और सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
बृजेंद्र यादव : भारतीय बॉक्सिंग का अगला बड़ा लक्ष्य क्या है?
प्रमोद कुमार : हमारा लक्ष्य बहुत स्पष्ट है—विश्व स्तर पर लगातार पदक जीतना और ओलंपिक में भारत को बॉक्सिंग की शीर्ष शक्तियों में शामिल करना। इसके लिए हमें आज से ही अगली पीढ़ी तैयार करनी होगी।
बृजेंद्र यादव : अंत में भारतीय मुक्केबाजों और उनके प्रशंसकों के लिए आपका संदेश?
प्रमोद कुमार : मैं दश के सभी मुक्केबाजों से यही कहना चाहता हूं कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। रिंग में उतरते समय अपने देश पर गर्व महसूस करें और हर मुकाबले को अपना सर्वश्रेष्ठ देने का अवसर मानें। भारतीय बॉक्सिंग का भविष्य बहुत उज्ज्वल है और हम सब मिलकर इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।

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