लोकेशन- सिद्धार्थनगर उत्तर प्रदेश।
संवाददाता- संतोष कुमार NN81
दिनांक- 23-8-2026
अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी के बलिदान दिवस पर गूंजा महापुरुषों का जयघोष, इतिहास और अधिकारों की लड़ाई का लिया संकल्प।
जनपद सिद्धार्थनगर विकास खंड बर्डपुर के ग्राम गायघाट महुअरवा में महारानी अवंतीबाई लोधी सेवा समिति के बैनर तले अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी का बलिदान दिवस समारोह श्रद्धा, सामाजिक जागरूकता और राजनीतिक चेतना के वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गांव के नौजवानों, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई और उनके बलिदान को याद करते हुए पूरा कार्यक्रम स्थल महापुरुषों के जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान महारानी अवंतीबाई लोधी अमर रहें, अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी अमर रहें, स्वामी ब्रह्मानंद लोधी अमर रहें, राजा हृदय शाह लोधी अमर रहें, सावित्रीबाई फुले अमर रहें, ज्योतिराव फुले अमर रहें और बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर अमर रहें के नारे लगाए गए। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि देश की आजादी केवल इतिहास की किताबों का विषय नहीं, बल्कि उन असंख्य वीरों के त्याग और बलिदान की कहानी है जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के सामने झुकने से इनकार कर दिया और देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
समारोह को संबोधित करते हुए महारानी अवंतीबाई लोधी सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष कन्हैया लाल लोधी ने अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी के जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुलाब सिंह लोधी का जन्म उन्नाव जिले के फतेहपुर चौरासी क्षेत्र के चंदीकाखेड़ा गांव में रामरतन लोधी के परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनमें साहस, स्वाभिमान और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का जज्बा था। अंग्रेजी शासन के दौर में जब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था और राष्ट्रीय ध्वज फहराना भी अंग्रेजी हुकूमत की नजर में अपराध माना जाता था, उस समय गुलाब सिंह लोधी स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े और तिरंगे की आन-बान-शान के लिए संघर्ष किया। झंडा सत्याग्रह के दौरान लखनऊ के अमीनाबाद पार्क में अंग्रेजी शासन की रोक के बावजूद तिरंगा फहराने का साहस दिखाया। अंग्रेजी पुलिस की गोलियों के सामने भी उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज को झुकने नहीं दिया और देश की आजादी के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। कन्हैया लाल लोधी ने कहा कि गुलाब सिंह लोधी का बलिदान इस बात का प्रतीक है कि देश की स्वतंत्रता और सम्मान के लिए एक सच्चा क्रांतिकारी अपने प्राणों की भी परवाह नहीं करता। आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी उनके जीवन संघर्ष को जाने और यह समझे कि तिरंगा केवल कपड़े का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि देश के वीरों के त्याग, संघर्ष और बलिदान की पहचान है।
कन्हैया लाल लोधी ने कहा कि महापुरुषों की जयंती और बलिदान दिवस मनाने का उद्देश्य केवल माल्यार्पण और नारेबाजी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके विचारों को समाज और नई पीढ़ी तक पहुंचाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि महारानी अवंतीबाई लोधी, अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी, स्वामी ब्रह्मानंद लोधी, राजा हृदय शाह लोधी, ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले और बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे महापुरुषों ने अपने-अपने समय में अन्याय, असमानता, शोषण, गुलामी और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने संविधान के माध्यम से समानता और अधिकारों की मजबूत नींव रखी, ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा तथा सामाजिक बराबरी की लड़ाई लड़ी और स्वतंत्रता आंदोलन के वीरों ने देश को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराने के लिए अपना जीवन तक न्योछावर कर दिया। इसलिए इन महापुरुषों की विरासत को बचाना और उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाना वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि देश में महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, चिकित्सा, कृषि और युवाओं के भविष्य से जुड़े अनेक गंभीर प्रश्न मौजूद हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ी शिकायतों के कारण युवाओं में निराशा पैदा होती है। उन्होंने कहा कि अयोध्या सहित देश के विभिन्न हिस्सों में सामने आने वाली घटनाओं तथा आम जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकारों और राजनीतिक दलों को संवेदनशीलता के साथ जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता केवल चुनाव के समय महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि उसकी समस्याओं और अधिकारों पर पूरे पांच वर्ष गंभीरता से काम होना चाहिए। उन्होंने सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और असमानता जैसी बुराइयों को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि देश को वैज्ञानिक सोच, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर चिकित्सा, मजबूत कृषि व्यवस्था और रोजगार के अवसरों की दिशा में लगातार आगे बढ़ना होगा।
कन्हैया लाल लोधी ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि सिद्धार्थनगर में लोधी समाज की बड़ी आबादी होने के बावजूद राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी के सवाल पर समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संख्या तभी शक्ति बनती है जब समाज शिक्षित, जागरूक, संगठित और एकजुट हो। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को किसी एक राजनीतिक दल की गुलामी करने के बजाय अपने मुद्दों, हक, अधिकार, सम्मान और प्रतिनिधित्व के सवाल पर लोकतांत्रिक ढंग से अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को भी समाज की आबादी, समस्याओं और भागीदारी को देखते हुए उचित प्रतिनिधित्व देना चाहिए। उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वे आपसी मतभेद भूलकर शिक्षा, संगठन और सामाजिक एकता को प्राथमिकता दें तथा आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य के लिए सामूहिक रूप से काम करें।
कार्यक्रम में पूर्व ग्राम प्रधान ओमप्रकाश लोधी ने ग्राम सभा की स्थानीय समस्याओं और विकास की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गांव का विकास केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि ग्रामीणों की एकजुट भागीदारी से भी संभव है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण आपसी भाईचारा बनाए रखें और ग्राम सभा के विकास के लिए मिलकर प्रयास करें। उन्होंने कहा कि वह अपने गांव को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे और इसके लिए ग्रामीणों का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने महापुरुषों की जयंती और बलिदान दिवस जैसे कार्यक्रमों को सामाजिक एकता का माध्यम बताते हुए कहा कि गांव में ऐसे आयोजन आगे भी होते रहने चाहिए, ताकि बच्चों और युवाओं को अपने इतिहास और महापुरुषों के संघर्षों की जानकारी मिल सके।
राजाराम लोधी और रामअंचल लोधी ने भी अपने संबोधन में सामाजिक एकता, शिक्षा, भाईचारे और ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि आज की पीढ़ी यदि अपने इतिहास और महापुरुषों के संघर्ष को भूल गई तो आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से कट जाएंगी। इसलिए गांव-गांव में ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों और युवाओं को स्वतंत्रता सेनानियों तथा समाज सुधारकों के जीवन से परिचित कराना जरूरी है। वक्ताओं ने कहा कि महापुरुष किसी एक जाति या समाज की संपत्ति नहीं होते, बल्कि उनके विचार पूरे देश और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत होते हैं।समारोह में उपस्थित ग्रामीणों ने भी अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके बलिदान को याद किया। कार्यक्रम में रामसुभग, सोमई, सूरज, रामनेवास, सर्वजीत, केशव लोधी, फूलचंद गुप्ता, कैलाश लोधी, वीरू लोधी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। महिलाओं, बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की सहभागिता ने कार्यक्रम को व्यापक जनभागीदारी का स्वरूप दिया। उपस्थित लोगों ने कहा कि महापुरुषों की जयंती और बलिदान दिवस केवल किसी एक समाज का कार्यक्रम नहीं, बल्कि इतिहास और सामाजिक चेतना को जीवित रखने का माध्यम हैं।
समारोह के दौरान महारानी अवंतीबाई लोधी की जयंती के अवसर पर 16 अगस्त को आयोजित सामाजिक जागरण कार्यक्रम का भी उल्लेख किया गया। कन्हैया लाल लोधी ने कहा कि महारानी अवंतीबाई लोधी सेवा समिति आने वाले समय में गांव स्तर से लेकर ग्राम पंचायत, ब्लॉक, तहसील, जिला और प्रदेश स्तर तक महापुरुषों की जयंती और बलिदान दिवस कार्यक्रम आयोजित कर जनजागरण अभियान को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल लोधी समाज के महापुरुषों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की आजादी, सामाजिक न्याय, शिक्षा, समानता और मानवता के लिए संघर्ष करने वाले सभी महापुरुषों और वीरांगनाओं को सम्मान देने का प्रयास होगा। उन्होंने कहा कि अपने इतिहास और विरासत को बचाने के साथ-साथ समाज को शिक्षा, वैज्ञानिक सोच, संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। अंत में उपस्थित लोगों ने अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी सहित देश के सभी स्वतंत्रता सेनानियों और समाज सुधारकों को नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने तथा सामाजिक एकता, भाईचारे और जनजागरण के अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

