लोकेशन -बरघाट
संवाददाता - मोहित यादव
तीन दिन की मियाद खत्म होने के बाद शिकायतकर्ता तक पहुंचा पत्र, मत्स्य विभाग की जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल : NN81
सिवनी के बरघाट की मत्स्य सहकारी समिति से जुड़ा मामला अब लगातार सवाल खड़े कर रहा है।मामला सामने आया है शिकायतकर्ता मोहित यादव द्वारा 29 जुलाई को की गई शिकायत के बाद की कार्रवाई का शिकायत के बाद सहकारिता विभाग की ओर से 31 जुलाई को जांच के संबंध में पत्र जारी किया गया। पत्र में संबंधित पक्ष को तीन दिन के भीतर दस्तावेज और रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
लेकिन सवाल यह है कि अगर पत्र 31 जुलाई को जारी हुआ था, तो शिकायतकर्ता को इसकी जानकारी 5 अगस्त को व्हाट्सऐप के माध्यम से क्यों दी गई? यानी तीन दिन की निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद सूचना पहुंचने की स्थिति में जांच की प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष और प्रभावी मानी जाएगी?
अब मामला यहीं खत्म नहीं होता।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि समिति के 64 सदस्य लगातार शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, कुछ सदस्यों को समिति से हटाए जाने की बात भी सामने आ रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या उन्हें हटाने से पहले कारण बताओ नोटिस और नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई गई?सबसे बड़ा सवाल अब निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर भी है।जब समिति के सदस्यों की सदस्यता और शिकायतों को लेकर विवाद पहले से सामने था, तो निर्वाचन अधिकारी ने इन शिकायतों और सदस्यता विवाद की निष्पक्ष जांच किए बिना चुनाव प्रक्रिया को आगे कैसे बढ़ाया !क्या चुनाव से पहले सभी 230 सदस्यों की सदस्यता, आपत्तियों और शिकायतों का विधिवत परीक्षण किया गया?और *अगर नहीं किया गया, तो फिर निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों का जवाब कौन देगा?* शिकायत में समिति के बैंक खाते से नकद राशि निकालने, सदस्यों को भुगतान करने और शेष राशि के हिसाब-किताब को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब सवाल सीधे मत्स्य विभाग और प्रशासन से है—
क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी?
क्या शिकायत करने वाले 64 सदस्यों की आपत्तियों पर सुनवाई होगी?
क्या चुनाव प्रक्रिया और सदस्यता सूची की भी जांच होगी?
और सबसे अहम—क्या जिम्मेदारी तय करके कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
न्यूज़ नेशन 81 इस पूरे मामले में सामने आए दस्तावेजों और शिकायतों के आधार पर सवाल उठा रहा है। आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित विभाग की जांच और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही होगी।



