भीलवाड़ा प्रसूता मौत प्रकरण: प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में सामने आए अलग-अलग चिकित्सकीय कारण, विभाग ने कहा— प्रोटोकॉल के अनुसार हुआ उपचार
भीलवाड़ा/जयपुर = महात्मा गांधी चिकित्सालय, भीलवाड़ा में उपचार के दौरान दो प्रसूताओं की मौत के मामले में चिकित्सा विभाग की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार दोनों महिलाओं की मौत अलग-अलग गंभीर चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण हुई। विभाग का कहना है कि दोनों मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार तत्काल उपचार दिया गया, लेकिन उनकी अत्यंत गंभीर स्थिति के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।
रानी बंजारा की मौत का कारण एम्नियोटिक फ्लूइड एम्बोलिज्म
रिपोर्ट के अनुसार 18 वर्षीय रानी बंजारा को 29 जुलाई की शाम सक्रिय प्रसव पीड़ा के दौरान महात्मा गांधी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। रात 8:01 बजे उनका सामान्य प्रसव हुआ और उन्होंने एक स्वस्थ बालिका को जन्म दिया।
प्रसव के तुरंत बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। चिकित्सकों ने तत्काल ऑक्सीजन, पुनर्जीवन (रेसुसिटेशन), विशेषज्ञों की टीम द्वारा संयुक्त उपचार, रक्त चढ़ाने सहित सभी आवश्यक उपचार शुरू किए। प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव (PPH) होने पर सभी मानक चिकित्सा प्रक्रियाएं अपनाई गईं और उन्हें मेडिकल आईसीयू में भर्ती किया गया। इसके बावजूद लगातार प्रयासों के बाद रात 11:30 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
प्रारंभिक जांच में उनकी मृत्यु का कारण एम्नियोटिक फ्लूइड एम्बोलिज्म, डिसेमिनेटेड इंट्रावास्कुलर कोएगुलेशन (DIC), प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव और हाइपोवोलेमिक शॉक बताया गया है। विभाग के अनुसार एम्नियोटिक फ्लूइड एम्बोलिज्म प्रसूति विज्ञान की अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा जटिलता है।
सुगना बैरवा गंभीर एनीमिया और हाइपोवोलेमिक शॉक से नहीं बच सकीं
दूसरे मामले में 21 वर्षीय सुगना बैरवा, निवासी दातला (कोटड़ी), को जिला अस्पताल शाहपुरा से गंभीर हालत में महात्मा गांधी चिकित्सालय रेफर किया गया। अस्पताल पहुंचने पर उनकी स्थिति बेहद नाजुक थी। उनका हीमोग्लोबिन मात्र 1.8 ग्राम प्रति डेसीलीटर था तथा प्लेटलेट्स 86 हजार थे। शाहपुरा में उनका मृत शिशु (स्टिल बर्थ) का प्रसव हुआ था और भीलवाड़ा लाते समय उन्हें दो बार दौरे भी पड़े।
अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, फिजिशियन और आईसीयू टीम ने तत्काल वेंटिलेटर सपोर्ट, इंट्यूबेशन, जीवनरक्षक दवाइयों, रक्त एवं प्लाज्मा सहित सभी आवश्यक उपचार शुरू किए। बावजूद इसके उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और देर रात सभी प्रयास विफल रहने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में उनकी मृत्यु का कारण गंभीर एनीमिया के साथ हाइपोवोलेमिक शॉक बताया गया है।
विभाग का पक्ष
चिकित्सा विभाग ने स्पष्ट किया है कि दोनों मामलों में मरीजों की गंभीर चिकित्सकीय स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार तत्काल उपचार उपलब्ध कराया गया तथा दोनों की जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए। प्रारंभिक जांच में उपचार में लापरवाही की पुष्टि नहीं हुई है।

