संवाददाता- ऐश्वर्य सुमित मिश्रा,
सिवनी। जनजातीय कार्य विभाग, सिवनी के अंतर्गत वीरांगना रानी दुर्गावती शासकीय कन्या छात्रावास की तत्कालीन अधीक्षिका प्रियंका ठाकुर के स्थानांतरण के बाद छात्रावास के शासकीय बैंक खाते से ₹1.01 लाख की राशि कथित रूप से व्यक्तिगत खातों में स्थानांतरित किए जाने का मामला सामने आया है। इससे विभागीय वित्तीय व्यवस्था और शासकीय राशि के उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया गया है कि प्रियंका ठाकुर का स्थानांतरण 7 जुलाई 2026 को उच्चतर माध्यमिक शाला शिकारा, विकासखंड घंसौर किया गया था। आरोप है कि स्थानांतरण के बाद भी छात्रावास के शासकीय बैंक खाते से चेक क्रमांक 454375 के माध्यम से ₹82,500 उनके व्यक्तिगत बैंक खाते में तथा चेक क्रमांक 454376 के माध्यम से ₹18,500 उनके भाई राजेश ठाकुर के बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए। दोनों भुगतानों की कुल राशि ₹1,01,000 बताई जा रही है।
स्थानांतरण के बाद खाते के संचालन पर सवाल
मामले में प्रमुख सवाल यह है कि स्थानांतरण के बाद प्रियंका ठाकुर को छात्रावास के शासकीय बैंक खाते के संचालन का अधिकार था या नहीं। यदि अधिकार था तो किस सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के आधार पर भुगतान किए गए और यदि अधिकार नहीं था तो उक्त चेकों से राशि का अंतरण कैसे हुआ?
यह भी जांच का विषय है कि दोनों भुगतानों के लिए सक्षम अधिकारी की स्वीकृति, भुगतान वाउचर, कैशबुक एवं लेजर में संबंधित प्रविष्टियां तथा राशि के उपयोग का प्रमाण उपलब्ध है या नहीं। यदि जांच में बिना वैध स्वीकृति अथवा निर्धारित प्रक्रिया के शासकीय राशि व्यक्तिगत खातों में स्थानांतरित होना प्रमाणित होता है तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का विषय हो सकता है।
रिन्यूअल और स्थानांतरण के नाम पर वसूली के आरोप
प्रियंका ठाकुर पर अन्य छात्रावास एवं आश्रम अधीक्षकों से रिन्यूअल तथा स्थानांतरण के नाम पर राशि वसूले जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों की भी स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है। जांच में संबंधित अधीक्षकों के बयान, बैंक लेनदेन, संदेश अथवा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जानी चाहिए।
यदि कथित वसूली में किसी वरिष्ठ अधिकारी अथवा सहायक आयुक्त के नाम का इस्तेमाल किया गया था, तो जांच में यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित अधिकारी को इसकी जानकारी थी या नहीं।
कलेक्टर के ध्यानाकर्षण हेतु जांच की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर नेहा मीना के ध्यानाकर्षण हेतु मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच में 7 जुलाई 2026 का स्थानांतरण आदेश, प्रभार हस्तांतरण रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट, चेकबुक, चेक क्रमांक 454375 एवं 454376, कैशबुक, लेजर, भुगतान वाउचर और स्वीकृति आदेश सहित सभी संबंधित अभिलेखों का परीक्षण कराया जाए।
यदि जांच में शासकीय राशि का नियम विरुद्ध आहरण अथवा उपयोग प्रमाणित होता है तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार राशि की वसूली, विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा आवश्यकतानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाए। वहीं रिन्यूअल एवं स्थानांतरण के नाम पर कथित वसूली के आरोप भी जांच के दायरे में लेकर दोष सिद्ध होने पर जवाबदेही तय की जाए।
नोट: समाचार में उल्लेखित आरोप उपलब्ध शिकायत/दस्तावेजों पर आधारित हैं। आरोपों की पुष्टि निष्पक्ष जांच एवं विभागीय अभिलेखों से ही होगी। संबंधित अधीक्षिका एवं विभागीय अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


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