NEWS NATION81 | सिवनी।
संवाददाता—ऐश्वर्य सुमित मिश्रा
इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय सिवनी में 29 जुलाई को रोगी कल्याण समिति की बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और अस्पताल की आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने का रोडमैप तैयार किया गया। कलेक्टर एवं रोगी कल्याण समिति की अध्यक्ष श्रीमती नेहा मीना की अध्यक्षता और विधायक दिनेश राय की उपस्थिति में हुई बैठक में सोनोग्राफी, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन, आंतरिक सड़कों व भवनों की मरम्मत, दुकानदारों के लिए सुविधाएं तथा लंबे समय से अनुपयोगी एम्बुलेंसों को फिटनेस के बाद पुनः संचालन में लाने जैसे निर्णय लिए गए।
सरकारी स्तर पर जारी बैठक के विवरण में मरीजों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। लेकिन बैठक के फैसलों के बीच अस्पताल की कथित जमीनी स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। सवाल यह नहीं कि बैठक हुई या नहीं, बल्कि यह है कि बैठक के बाद अस्पताल में वास्तव में कितना बदलाव आया?
रात में 108 नहीं मिलने का दावा
अधिवक्ता नवेन्दु मिश्रा द्वारा जारी वीडियो में जिला अस्पताल में रात के समय दुर्घटना के मरीजों की मौजूदगी और 108 एम्बुलेंस की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। वीडियो में अस्पताल परिसर में दो 108 वाहन—CG-04-NS-4587 और CG-04-NS-2515—दिखाए गए हैं। वीडियो में दावा किया गया कि सिवनी जिले में छह 108 एम्बुलेंस हैं, लेकिन इनमें कई वाहन खराब अथवा सेवा से बाहर हैं।
दावा यह भी है कि जरूरत पड़ने पर लखनादौन, छपारा या बरघाट से एम्बुलेंस बुलाने की स्थिति बनती है। यदि यह स्थिति सही है तो जिला अस्पताल जैसे प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र के लिए यह गंभीर आपातकालीन व्यवस्था का विषय है।
हालांकि इन दावों की पुष्टि केवल वीडियो से नहीं की जा सकती। प्रशासनिक स्तर पर 108 के GPS रिकॉर्ड, कॉल-डिस्पैच डाटा, वाहन लॉगबुक, फिटनेस रिकॉर्ड, वर्कशॉप रिकॉर्ड और ड्यूटी रोस्टर की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
418 कर्मचारियों की नियुक्ति भी जांच के घेरे में
इसी बीच स्वास्थ्य विभाग में मृत्युंजय ट्रेडर्स के माध्यम से लगभग 418 आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्तियों को लेकर उठे सवाल भी महत्वपूर्ण हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2024 में जिले की स्वास्थ्य संस्थाओं के लिए विभिन्न श्रेणियों के आउटसोर्स मानव संसाधन की प्रक्रिया शुरू हुई थी और बाद में मृत्युंजय ट्रेडर्स को सेवाएं उपलब्ध कराने का कार्य मिलने की जानकारी सामने आई।
मामले में सवाल यह है कि क्या सभी नियुक्तियां मूल निविदा और कार्यादेश की शर्तों के अनुसार हुईं? क्या प्रत्येक कर्मचारी की वास्तविक तैनाती हुई? क्या संबंधित संस्थाओं में उनकी उपस्थिति दर्ज हुई और क्या उसी आधार पर भुगतान किया गया?
यानी जांच का सीधा फॉर्मूला है—
निविदा → कार्यादेश → नियुक्ति/तैनाती → वास्तविक उपस्थिति → भुगतान।
इन पांचों स्तरों के दस्तावेज यदि आपस में मेल खाते हैं तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। लेकिन यदि स्वीकृत कार्य और वास्तविक नियुक्तियों में अंतर, वास्तविक उपस्थिति के अभाव या भुगतान में विसंगति सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने का विषय बन सकता है।
बैठक में एम्बुलेंस, बाहर सवाल
सबसे महत्वपूर्ण विडंबना यही है कि 29 जुलाई की बैठक में पुरानी एम्बुलेंसों को मरम्मत और फिटनेस के बाद दोबारा चलाने के निर्देश दिए गए, जबकि इसके कुछ ही समय बाद अस्पताल में आपातकालीन 108 उपलब्धता को लेकर वीडियो सामने आया।
इसी तरह बैठक में आंतरिक सड़कों, भवनों, सफाई एवं अन्य सुविधाओं को लेकर निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में अब जरूरत केवल निर्देश जारी करने की नहीं, बल्कि उनके पालन की निगरानी की है
अस्पताल परिसर में जर्जर सड़क, अस्वच्छ शौचालय, दुर्गंध, सफाई व्यवस्था की शिकायत और मैटरनिटी वार्ड के आसपास आवारा पशुओं की मौजूदगी जैसे मुद्दे यदि वास्तविक हैं तो इनका तत्काल स्थलीय सत्यापन आवश्यक है। विशेषकर प्रसूति एवं नवजात क्षेत्र में सुरक्षा और स्वच्छता को किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

