संवाददाता : अनिल मालवीय सिराली
आग के बीच जान की परवाह किए बिना अंदर पहुंचे टिमरनी विधायक, गैस सिलेंडर बाहर निकालकर टाला बड़ा हादसा:
हरदा जिले कि सिराली तहसील के खुदिया कि माध्यमिक शाला खुदिया में शनिवार को अचानक लगी आग ने कुछ ही देर में ऐसा विकराल रूप ले लिया कि विद्यालय परिसर में मौजूद लोगों के बीच हड़कंप मच गया। स्कूल में उस समय करीब 265 बच्चे मौजूद थे और जिस हिस्से में आग लगी थी, वहीं गैस सिलेंडर भी रखा हुआ था। सिलेंडर आग की चपेट में आने से बड़ा हादसा होने की आशंका से हर किसी की चिंता बढ़ गई।
हालात बेहद गंभीर थे। आग और धुएं के बीच अंदर जाना भी जोखिम भरा था। इसी दौरान घटना की सूचना मिलते ही टिमरनी विधायक अभिजीत शाह मौके पर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने बिना समय गंवाए स्वयं आग की लपटों और धुएं के बीच विद्यालय के अंदर प्रवेश किया।
विधायक शाह ने अपनी जान की परवाह किए बिना आग की चपेट में आए हिस्से से गैस सिलेंडर को बाहर निकाला और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। सिलेंडर बाहर आते ही एक बड़े संभावित हादसे का खतरा टल गया। इसके बाद आग पर काबू पाने के लिए अग्निशामक यंत्र और पानी का इस्तेमाल किया गया।
कुछ मिनटों का फैसला, सैकड़ों जिंदगियां सुरक्षित
अगर गैस सिलेंडर आग की चपेट में रहता और फट जाता तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। विद्यालय में मौजूद 265 बच्चों के साथ-साथ शिक्षक और आसपास के लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती थी। लेकिन समय रहते लिए गए साहसिक निर्णय से संभावित बड़ी दुर्घटना टल गई।
“उस वक्त अपनी नहीं, बच्चों की चिंता थी”
घटना के बाद विधायक अभिजीत शाह ने कहा, “उस समय यह सोचने का मौका नहीं था कि मेरे साथ क्या होगा। सामने स्कूल के बच्चे थे। मन में सिर्फ यही था कि किसी बच्चे को कुछ नहीं होना चाहिए।”
विधायक के इस साहसिक कदम की मौके पर मौजूद लोगों ने सराहना की। आग पर नियंत्रण के बाद जब सभी 265 बच्चों के सुरक्षित होने की जानकारी मिली तो अभिभावकों, शिक्षकों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
आग के बीच बना भरोसे का पल
खुदिया स्कूल की यह घटना सिर्फ आग बुझाने तक सीमित नहीं रही। संकट की घड़ी में एक जनप्रतिनिधि ने मौके पर पहुंचकर जिस तरह तत्काल निर्णय लिया, उसने वहां मौजूद लोगों को भरोसा दिया।
धधकती आग, चारों तरफ धुआं और सामने सैकड़ों बच्चों की जिंदगी—ऐसे वक्त में विधायक अभिजीत शाह का आग के बीच जाकर गैस सिलेंडर बाहर निकालना चर्चा का विषय बन गया।
एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया और 265 बच्चों के चेहरे पर फिर लौट आई मुस्कान।

