कोटड़ी, पिड़ावा | 10 अगस्त
श्रावण मास में भक्ति और तपस्या की मिसाल पेश करते हुए ग्राम कोटड़ी से 22 कावड़ यात्रियों की टोली डाक कावड़ यात्रा पर महाकाल की नगरी उज्जैन गई थी।
दिनांक 8 अगस्त 2026 को यह टोली पैदल दौड़ते हुए उज्जैन पहुंची और वहां पवित्र शिप्रा नदी से जल लेकर निरंतर दौड़ते हुए रात 10:00 बजे अपने गांव कोटड़ी लौटी।
भव्य स्वागत किया गया
कावड़ यात्रियों के आगमन की सूचना पर ग्रामीणों में भारी उत्साह देखने को मिला। पिड़ावा-कोटड़ी चौराहे से ही ग्रामीण डीजे की धुन पर नृत्य करते हुए और दौड़ते हुए कावड़ यात्रियों के साथ गांव के बस स्टैंड तक आए। बस स्टैंड पर ग्रामवासियों ने सभी कावड़ यात्रियों का फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया।
इसके बाद सभी कावड़ यात्री गांव के भोलेनाथ मंदिर पहुंचे, जहाँ शिप्रा जी के पवित्र जल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया गया। मंदिर प्रांगण में भी सभी यात्रियों का फूल-मालाओं से स्वागत-सम्मान किया गया।
जलाभिषेक के साथ ही इंद्रदेव हुए मेहरबान
ग्रामीणों का कहना है कि जैसे ही भोलेनाथ को जल अर्पित किया गया, वैसे ही इंद्रदेव मेहरबान हो गए। पूरी रात रिमझिम-रिमझिम बारिश होती रही और सुबह 8 बजे से क्षेत्र में मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया, जिससे आसपास के रास्ते अवरुद्ध हो गए और पूरा क्षेत्र जलमग्न हो गया।
ग्रामीणों ने इसे भोलेनाथ द्वारा कावड़ यात्रियों की तपस्या स्वीकार करने के रूप में देखा।
ग्राम पंचायत कोटड़ी के सरपंच हरिराम गोचर ने बताया कि "हम संपूर्ण ग्रामवासी डाक कावड़ यात्रियों का बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं। आपकी कठिन तपस्या और भक्ति ने एक ही दिन में क्षेत्र की तस्वीर बदल दी। भगवान महाकाल की कृपा से सूखे क्षेत्र में खुशहाली लौटी है। हम बारंबार सभी कावड़ यात्रियों का स्वागत करते हैं।"
सम्पूर्ण गांव में जय महाकाल के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया।

