कार्यशाला का उद्देश्य जेंडर समानता को ग्रामीण विकास एवं आजीविका कार्यक्रमों से जोड़ते हुए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, जेंडर रिसोर्स सेंटरों की कार्यप्रणाली को मजबूत करना तथा जेंडर नॉर्म्स पर किए गए अध्ययन के निष्कर्षों को साझा करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं पौधारोपण के साथ हुआ।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन संचालक अश्विनी देवांगन, चैतन्य संस्था की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर कल्पना पंत, SIRD की संयुक्त संचालक सीमा मिश्रा, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के एल.के. शर्मा, धमतरी की जेंडर मास्टर ट्रेनर सुलोचना साहू, कांकेर की जेंडर मास्टर ट्रेनर चैती रात्रे तथा उतई थाना (दुर्ग) की परामर्शदाता राधा बांधे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
चैतन्य संस्था की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर कल्पना पंत ने बताया कि वर्ष 2018 से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अंतर्गत जेंडर समानता कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणामों के चलते छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का वास्तविक सशक्तिकरण आर्थिक आत्मनिर्भरता, निर्णय लेने के अधिकार और नेतृत्व के अवसरों से ही संभव है।
उन्होंने बताया कि राज्य में स्थापित 67 जेंडर रिसोर्स सेंटर (GRC) महिलाओं को अधिकार, सुरक्षा, न्याय, सरकारी योजनाओं तक पहुंच, कानूनी सहायता और परामर्श उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस विभाग तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के बीच बेहतर समन्वय से इन केंद्रों को वन स्टॉप सखी सेंटर के उप-केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।
धमतरी की जेंडर मास्टर ट्रेनर सुलोचना साहू ने बताया कि जीआरसी के माध्यम से घरेलू एवं लैंगिक हिंसा से प्रभावित महिलाओं और बालिकाओं को समय पर परामर्श, कानूनी सहायता और विभागीय सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं कांकेर की जेंडर मास्टर ट्रेनर चैती रात्रे ने कहा कि सामुदायिक स्तर पर प्रशिक्षण और क्षमता विकास के माध्यम से महिलाओं तक प्रभावी सहायता पहुंचाने में सफलता मिली है।
उतई थाना की परामर्शदाता राधा बांधे ने बताया कि पुलिस थानों में संचालित परामर्श सेवाओं के माध्यम से पारिवारिक विवादों और महिलाओं से जुड़े मामलों का संवेदनशील समाधान किया जा रहा है।
कार्यक्रम में सीनियर रिसर्चर श्रेया सिंह ने जेंडर नॉर्म्स पर किए गए शोध के प्रमुख निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए महिलाओं की निर्णय क्षमता, आर्थिक भागीदारी और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया। पुलिस विभाग की प्रतिनिधि गरिमा ने महिला डेस्क, महिला सुरक्षा और त्वरित सहायता तंत्र की जानकारी दी।
स्वास्थ्य सेवाओं की संचालक डॉ. स्मृति देवांगन ने महिलाओं एवं किशोरियों में एनीमिया की चुनौती, सुरक्षित मातृत्व, पोषण और मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए चलाए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। शिक्षा विभाग के सहायक संचालक ओ.पी. चौधरी ने बालिका शिक्षा, कौशल विकास और ड्रॉपआउट रोकने को जेंडर समानता की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
महिला एवं बाल विकास विभाग की अनुसंधान एवं प्रशिक्षण विशेषज्ञ निशा गोस्वामी ने महिला हेल्पलाइन-181, सखी वन स्टॉप सेंटर, नवा बिहान योजना, शक्ति सदन, महतारी वंदन योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। वहीं प्रदान संस्था की प्रतिनिधि आभा तथा ट्रांसफॉर्मिंग रूरल इंडिया फाउंडेशन की डॉ. अनु सिंह ने महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, सामूहिक उद्यमों और स्वयं सहायता समूहों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि एवं मिशन संचालक अश्विनी देवांगन ने कहा कि जेंडर रिसोर्स सेंटर महिलाओं तक संवेदनशील और समयबद्ध सहायता पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने जेंडर मास्टर ट्रेनर्स से महिलाओं की वास्तविक समस्याओं तक पहुंचकर उन्हें संस्थागत सहायता दिलाने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों एवं विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यशाला में राज्य एवं जिला स्तर के अधिकारी, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, जेंडर मास्टर ट्रेनर्स, पुलिस परामर्शदाता, तकनीकी सहयोगी संस्थाओं तथा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन सुश्री सुधा कड़व, राज्य समन्वयक, चैतन्य संस्था ने किया।

