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स्वयं सहायता समूह से जुड़कर शुरू किया सफर, अब परिवार की मासिक आय पहुंची 25 हजार रुपए तक : NN81

 


लोकेशन/ आगर मालवा 

संवादाता : संजय डगवाल 

मजदूरी से वाहन मालिक बनीं बबीता, आजीविका मिशन ने बदली जिंदगी: 

आगर-मालवा, 22 जुलाई 2026। दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किसी भी व्यक्ति के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। आगर-मालवा जिले के आवर गांव की बबीता राठौर इसकी प्रेरणादायी मिसाल हैं। कभी परिवार की आर्थिक जरूरतों के लिए संघर्ष करने वाली बबीता आज न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि एक वाहन की मालकिन बनकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही हैं।

बबीता ने अपने आत्मनिर्भरता के सफर की शुरुआत आजीविका मिशन से जुड़कर की। स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनने के बाद उन्होंने सामुदायिक संसाधन व्यक्ति के रूप में कार्य किया। इस दौरान मिले अनुभव और आत्मविश्वास ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। इसके बाद उन्होंने घर पर ही साड़ी की दुकान शुरू की, जिससे परिवार को नियमित आय का साधन मिला।

मेहनत और वर्षों की बचत के साथ आजीविका मिशन के माध्यम से बैंक से प्राप्त सीसीएल ऋण का उपयोग कर बबीता ने मारुति ईको वाहन खरीदा। वर्तमान में यह वाहन स्कूल वाहन के रूप में संचालित हो रहा है, जिससे परिवार को प्रतिमाह लगभग 18 हजार रुपए की आय प्राप्त हो रही है। अन्य आय स्रोतों को मिलाकर परिवार की कुल मासिक आय अब लगभग 25 हजार रुपए तक पहुंच गई है।

पति और बेटे को भी मिला रोजगार का सहारा

बबीता के पति पहले मंडी में मजदूरी का कार्य करते थे, लेकिन अब वे वाहन संचालन में सहयोग कर रहे हैं। वहीं, उनके बेटे को भी आजीविका मिशन के माध्यम से कियोस्क संचालन का कार्य मिला है। इससे परिवार की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित हुए हैं और आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है।

परिवार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत आवास और अपनी बचत का उपयोग कर पक्का मकान भी तैयार किया है। इस तरह आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद बबीता के परिवार के जीवन में रोजगार, आय और आवास के स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव आया है।

बबीता राठौर कहती हैं, “आजीविका मिशन ने मुझे केवल रोजगार नहीं दिया, बल्कि अपने सपनों पर भरोसा करना भी सिखाया। आज मेरे परिवार के चेहरे पर जो मुस्कान है, वह इसी विश्वास और मेहनत की कमाई है।”

बबीता की यह प्रेरणादायी यात्रा ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के लिए मिसाल है। उनकी कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन, मेहनत और सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ लेकर महिलाएं न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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