पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधानपीठ श्रीनाथजी की हवेली में अधिकमास के मनोरथों के क्रम में बुधवार को ज्येष्ठ कृष्ण दशमी के अवसर पर पूज्यपाद गोस्वामी तिलकायत 108 श्री राकेश जी महाराज श्री की आज्ञा व चिरंजीव गोस्वामी 105 श्री विशाल बावा साहब के मार्गदर्शन में भव्य नाव मनोरथ का आयोजन किया गया, राजभोग में श्रीजी व प्रियाजी में चंदन पत्ती मंडली के सुंदर मनोरथ आयोजित किए गए वहीं संध्या समय श्रीजी में "चंदन पहर नाव हरि बैठे" मनोरथ का आयोजन हुआ।
श्रीनाथजी को आज गुलाबी मलमल की परधनी व श्रीमस्तक पर पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार धराया गया,
ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार में सर्व आभरण हीरा के, श्रीमस्तक पर गुलाबी मलमल की छोर वाली पाग के ऊपर सिरपैंच, मोती की घुमावदार चमकानी गोल-चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये, श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये, हरे एवं कमल के पुष्पों की विविध पुष्पों की थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी ओर श्वेत पुष्पों एवं कमल की दो मालाजी हमेल की भांति भी धरायी, श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, चांदी के वेणु वेत्र धराये गए।
श्रीजी में उदयपुर के प्रसिद्द गणगौर-घाट, राजमहल, नौका-विहार, घूमर नृत्य करती गोपियों, श्री ठाकुर जी, श्री बलदेव जी एवं श्री नंद-यशोदा जी के सुन्दर चित्रांकन से सुशोभित पिछवाई धरायी गई ।
भीषण गर्मी में प्रभु को शीतलता प्रदान करने और मनमोहक प्राकृतिक श्रृंगार के भाव से चंदन पत्ती की सुंदर मंडली के मनोरथ का आयोजन किया, इस विशेष मनोरथ के दौरान प्रभु श्रीजी व प्रियाजी को राजभोग की झांकी में चंदन की सुगंधित पत्तियों और फूलों से बनी दुहेरी मंडली में बिराजित कर लाड़ लड़ाए।
संध्या समय श्रीजी में चंदन पहर नाव हरि बैठे मनोरथ का आयोजन किया गया।
वहीं श्री विशाल बावा साहब के मार्गदर्शन में मोती महल में श्याम यमुना बीच खेवत नाव के चित्ताकर्षक मनोरथ का आयोजन किया गया, मोती महल में कृत्रिम ताल का निर्माण किया गया जिसमें यमुनाजी के भाव से विभिन्न इत्र आदि से सुवासित जल भरा गया, श्वेत व गुलाबी कमल, मोगरे ओर गुलाब के पुष्प पधाराए गए ओर कमल तलाई का निर्माण किया गाय । लकड़ी के खिलौन में मगरमच्छ, कछुए, मछलियां, चांदी की थालियों में रुई के बतख तैराई गई । ताल के किनारे चांदी के बंगले में श्रीजी स्वरूप श्री मदनमोहन लालजी को बिराजित किया गया ।
श्री विशाल बावा साहब ने मोगरा, गुलाब सहित विभिन्न कलियों से सुसज्जित नाव ने प्रभु नवनीत प्रियाजी को बिराजित कर भ्रमण करवाया व लाड लड़ाए ओर आरती उतारी ।
इस अवसर पर कीर्तनकारों द्वारा "बैठै घनस्याम सुंदर खेवत है नाव।
आज सखी मोहन संग , खेलवे को दाव"। सुंदर कीर्तन का सुमधुर गान किया।
प्रभु के इस भव्य व अलौकिक मनोरथ के दर्शनों में वैष्णव श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ा, तरणताल में प्रभु के नौकायन के विहंगम दृश्य के दर्शन कर लोग अभिभूत हो गए।
परेश पंड्या
