[वीर बंदा बैरागी के एक महान योद्धा, सेनापति और धर्म रक्षक थे, जिन्होंने मुगलों के अत्याचारों के खिलाफ डटकर संघर्ष किया। झारड़ा में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में समाज सेवी मनीष गुरु रोहिडा और प्रदीप जी बैरागी, मुकेश जी बैरागी, झारड़ा की उपस्थिति में उनके इसी गौरवशाली जीवन को याद किया गया।
उनकी संक्षिप्त जीवन गाथा इस प्रकार है:
## प्रारंभिक जीवन और वैराग्य
* जन्म और मूल नाम: उनका जन्म 27 अक्टूबर 1670 को पुंछ (जम्मू-कश्मीर) के राजौरी क्षेत्र में हुआ था और उनका बचपन का नाम लक्ष्मण देव था।
* वैराग्य धारण करना: मात्र 15 वर्ष की आयु में शिकार के दौरान एक गर्भवती हिरणी की मृत्यु से उनका मन विचलित हो गया। उन्होंने सब कुछ त्याग दिया और संन्यासी बनकर माधोदास बैरागी नाम अपनाया।
* आश्रम की स्थापना: उन्होंने देश भ्रमण करते हुए महाराष्ट्र में गोदावरी नदी के तट पर नांदेड़ में अपना एक मठ (आश्रम) स्थापित किया।
## जीवन का सबसे बड़ा मोड़
* गुरु गोबिंद सिंह जी से मुलाकात: साल 1708 में नांदेड़ में उनकी मुलाकात सिखों के 10वें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी से हुई। गुरु जी के व्यक्तित्व और देश-धर्म की रक्षा के संकल्प से वे बेहद प्रभावित हुए।
* नया नाम और जिम्मेदारी: गुरु जी ने उन्हें अपना 'बंदा' (सेवक) कहा, जिसके बाद उनका नाम बंदा सिंह बहादुर पड़ा। गुरु जी ने उन्हें धर्म की रक्षा और मुगलों के अत्याचार को समाप्त करने के लिए 5 तीर, एक तलवार और हुक्मनामा देकर पंजाब भेजा।
## सैन्य अभियान और मुगलों पर विजय
* सेना का गठन: उन्होंने पंजाब और हरियाणा के किसानों और आम लोगों को एकजुट कर एक शक्तिशाली सेना तैयार की।
* सरहिंद पर विजय: उन्होंने 'छप्परचिरी के युद्ध' में सरहिंद के क्रूर गवर्नर वजीर खान को हराकर उसे मृत्युदंड दिया। यह वही वजीर खान था जिसने गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों को जिंदा दीवार में चुनवा दिया था।
* प्रथम सिख राज्य की स्थापना: उन्होंने जमींदारी प्रथा को खत्म कर किसानों को भूमि का अधिकार दिया और गुरुओं के नाम पर सिक्के व मोहरें जारी कर स्वतंत्र राज्य की नींव रखी.।
## सर्वोच्च बलिदान (शहादत)
* क्रूर यातनाएं: साल 1715 में मुगलों द्वारा घेराबंदी के बाद उन्हें बंदी बना लिया गया और दिल्ली लाया गया। उन्हें धर्म बदलने के लिए विवश किया गया, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया।
* वीर गति: मुगल शासक फर्रुखसियर के आदेश पर उनके सामने उनके 4 वर्षीय मासूम पुत्र अजय सिंह की हत्या कर दी गई। इसके बाद 9 जून 1716 को अत्यधिक क्रूर और अमानवीय यातनाएं देकर वीर बंदा बैरागी को शहीद कर दिया गया।
संवाददाता प्रदीप बैरागी
