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नगर पालिका परिषद बोदरी में पेयजल संकट एवं सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले की निष्पक्ष जांच की मांग...........NN81



 नगर पालिका परिषद बोदरी क्षेत्र में व्याप्त गंभीर पेयजल संकट, सार्वजनिक सड़क एवं नाली को क्षति पहुंचाकर अवैध रूप से ट्यूबवेल एवं जल कनेक्शन स्थापित करने तथा दर्ज एफआईआर के बावजूद दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने के संबंध में आज कलेक्टर बिलासपुर को एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा गया।

शिकायत में उल्लेख किया गया है कि नगर पालिका परिषद बोदरी के वार्ड क्रमांक 1, 2, 3, 4, 5, 7, 11, 12, 14 एवं 15 के नागरिक लंबे समय से पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर वार्ड क्रमांक 13 में सार्वजनिक सड़क एवं नाली क्षेत्र को खोदकर निजी उपयोग हेतु ट्यूबवेल, पाइपलाइन एवं जल कनेक्शन स्थापित किए जाने का मामला सामने आया है, जिससे शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचा है।शिकायतकर्ताओं के अनुसार नगर पालिका परिषद द्वारा इस मामले में एफआईआर दर्ज कर सामग्री भी जब्त की गई थी, किंतु बाद में जब्त सामग्री वापस कर दी गई और दोषियों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इससे नागरिकों के बीच यह आशंका उत्पन्न हुई है कि प्रभावशाली व्यक्तियों के हस्तक्षेप के कारण कार्रवाई प्रभावित हुई है।कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए, दर्ज एफआईआर एवं उसके बाद की प्रशासनिक कार्यवाही की समीक्षा की जाए तथा अध्यक्ष प्रतिनिधि श्री विजय वर्मा एवं सीएमओ श्री प्रदीप मिश्रा की भूमिका की भी जांच की जाए कि कहीं उनके प्रभाव के कारण कार्रवाई प्रभावित तो नहीं हुई।

ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि अथवा अन्य व्यक्ति द्वारा दोषियों को संरक्षण देने, प्रकरण को दबाने अथवा शासकीय कार्यवाही को प्रभावित करने की पुष्टि होती है, तो उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए।

साथ ही सार्वजनिक सड़क एवं शासकीय संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन कर दोषियों से क्षतिपूर्ति की राशि वसूलने तथा प्रभावित वार्डों में नियमित एवं पर्याप्त पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।

शिकायतकर्ताओं ने कहा है कि यह मामला केवल पेयजल संकट का नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा, प्रशासनिक पारदर्शिता और नागरिकों के मूलभूत अधिकारों से जुड़ा हुआ है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई किया जाना आवश्यक है।

संवाददाता राजेन्द्र डहरिया 

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