जहां मुख्यमंत्री ने शिक्षा का संदेश दिया, वहीं दरारों ने विकास की तस्वीर दिखा दी
झारड़ा। मुख्यमंत्री द्वारा आज शासकीय महाविद्यालय झारड़ा के नवीन भवन का लोकार्पण किया गया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने शिक्षा को प्रदेश के विकास की आधारशिला बताते हुए युवाओं के बेहतर भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर दिया। लेकिन जिस महाविद्यालय भवन का उद्घाटन किया गया, उसी भवन की तस्वीरें उद्घाटन के साथ ही कई सवाल खड़े कर रही हैं।
लगभग 4 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित महाविद्यालय भवन के खंभों एवं दीवारों में दरारें दिखाई देने लगी हैं। उद्घाटन के दिन ही सामने आई इन तस्वीरों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये की लागत से बने भवन की यह स्थिति शुरुआत में ही दिखाई दे रही है, तो भविष्य में इसकी मजबूती और विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है।
करोड़ों खर्च, फिर भी गुणवत्ता पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और मजबूती सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन महाविद्यालय भवन में दिखाई दे रही दरारें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई होगी, तभी उद्घाटन के समय ही ऐसी स्थिति सामने आई है।
महाविद्यालय तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क तक नहीं
एक ओर करोड़ों रुपये का भवन बनाकर उसका लोकार्पण किया गया, वहीं दूसरी ओर महाविद्यालय तक पहुंचने के लिए आज भी व्यवस्थित पक्की सड़क उपलब्ध नहीं है। विद्यार्थियों, शिक्षकों और ग्रामीणों को कच्चे एवं उबड़-खाबड़ मार्ग से होकर महाविद्यालय पहुंचना पड़ता है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि भवन निर्माण के साथ-साथ मूलभूत सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए था।
प्रवेश मार्ग पर गंदगी और कचरे का अंबार
स्थिति और भी चिंताजनक तब दिखाई देती है जब महाविद्यालय पहुंचने वाले मार्ग पर नजर डालते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार जिस रास्ते से कॉलेज पहुंचा जाता है, उसी क्षेत्र में लंबे समय से झारड़ा नगर का कचरा डाला जा रहा है। मार्ग के आसपास गंदगी, दुर्गंध और कचरे के ढेर विद्यार्थियों और आगंतुकों का स्वागत करते दिखाई देते हैं। शिक्षा के मंदिर तक पहुंचने से पहले विद्यार्थियों को गंदगी के बीच से गुजरना पड़ना दुर्भाग्यपूर्ण माना जा रहा है।
अधिकारियों की निगरानी पर भी उठे सवाल
महाविद्यालय भवन में दिखाई दे रही दरारों के बाद संबंधित विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान तकनीकी अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण किए जाने चाहिए थे। यदि भवन में उद्घाटन के समय ही दरारें दिखाई दे रही हैं, तो यह केवल निर्माण एजेंसी ही नहीं बल्कि निगरानी व्यवस्था की भी विफलता मानी जानी चाहिए।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये के शासकीय निर्माण कार्यों में भुगतान और स्वीकृतियां अधिकारियों की संतुष्टि के बाद ही होती हैं। ऐसे में यदि निर्माण गुणवत्ता पर प्रश्न उठ रहे हैं तो इसकी निष्पक्ष तकनीकी जांच होना आवश्यक है।
जवाब मांगते सवाल
4 करोड़ से अधिक की लागत के बावजूद भवन में दरारें क्यों दिखाई दे रही हैं?
क्या निर्माण कार्य का गुणवत्ता परीक्षण सही ढंग से हुआ था?
महाविद्यालय तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क की व्यवस्था अब तक क्यों नहीं हुई?
कॉलेज के प्रवेश मार्ग पर कचरा डंपिंग को क्यों नहीं रोका गया?
निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी या नहीं?
जांच की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों ने महाविद्यालय भवन की स्वतंत्र तकनीकी जांच, निर्माण गुणवत्ता की समीक्षा तथा कॉलेज मार्ग से कचरा हटाकर स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये की सार्वजनिक राशि खर्च हुई है तो उसकी गुणवत्ता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
कटाक्ष
"मुख्यमंत्री ने शिक्षा का संदेश दिया, वहीं दरारों ने विकास की तस्वीर दिखा दी। करोड़ों के भवन, बदहाल पहुंच मार्ग और कचरे के ढेर के बीच खड़ा यह महाविद्यालय अब जवाब मांग रहा है।"
मेरे संज्ञान में मामला आया है पी. आई. यू से बात करूंगा एवं पत्र भी लिखूंगा
एच.एन.अनिजवाल
अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा विभाग उज्जैन संभाग
कॉलेज बने हुए एक से डेढ़ साल हो गया है हमें भी मालूम नहीं था निर्माण हमने गुणवत्ता से कराया था लेकिन किसी कारणवश हो गया है मिट्टी के रिसाव के कारण तो हमारे द्वारा निरीक्षण करके सभी कमी को पूरी कर दी जाएगी
संवाददाता प्रदीप बैरागी
