भिण्ड में फर्जी निराकरण के आरोपों से घिरी शिकायत निवारण व्यवस्था
बिना समाधान शिकायतें बंद, जनता में आक्रोश; ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
भिण्ड। मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी CM हेल्पलाइन 181 व्यवस्था भिण्ड जिले में गंभीर सवालों के घेरे में है। जिले के विभिन्न गांवों से लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिनमें शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उनकी समस्याओं का समाधान किए बिना, उनसे संपर्क किए बिना और उनकी संतुष्टि जाने बिना शिकायतों को बंद कराया जा रहा है। इससे जनता के बीच यह धारणा बन रही है कि कहीं शिकायत निवारण प्रणाली केवल कागजों और पोर्टल तक ही सीमित होकर तो नहीं रह गई।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिकायत का वास्तविक समाधान ही नहीं होना है और कार्यालयों में बैठकर भ्रामक रिपोर्ट भेजकर शिकायतें बंद करनी हैं, तो फिर CM हेल्पलाइन 181 का उद्देश्य क्या रह जाता है?
भारौली कलां का मामला: बिना सहमति बंद हुई शिकायत
ताजा मामला ग्राम पंचायत भारौली कलां का है। यहां के निवासी गौरव राजावत ने 14 मई 2026 को CM हेल्पलाइन पर शिकायत क्रमांक 38309364 दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि शौचालय सहायता राशि के लिए आवेदन करने के बावजूद लाभ नहीं मिला और कथित रूप से ₹3000 रिश्वत की मांग की जा रही है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि न तो किसी अधिकारी ने उनसे संपर्क किया, न कोई संतुष्टि ली गई और न ही समस्या का समाधान हुआ, इसके बावजूद 17 जून 2026 को शिकायत को ClosedAsDS" श्रेणी में बंद कर दिया गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिकायतकर्ता से बातचीत ही नहीं हुई तो फिर संतुष्टि का आधार क्या था?
नियम कुछ और, कार्रवाई कुछ और?
CM हेल्पलाइन की प्रक्रिया में शिकायतकर्ता की संतुष्टि को महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यदि बिना शिकायतकर्ता की जानकारी और बिना समस्या के समाधान के शिकायत बंद की जाती है तो पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ग्रामीण पूछ रहे हैं कि क्या अब शिकायतकर्ता की राय का कोई महत्व नहीं रह गया है?
बौहारा पंचायत में लाखों के भ्रष्टाचार की शिकायत भी बंद
ऐसे ही आरोप ग्राम पंचायत बौहारा में भी लगाए जा रहे हैं। यहां पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितताओं, फर्जी बिल-वाउचर, संदिग्ध मास्टर रोल और बिना कार्य कराए भुगतान निकालने के मामलों को लेकर शिकायत क्रमांक 38124162 दर्ज कराई गई थी।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में हुए कथित भ्रष्टाचार के दस्तावेज, बिल-वाउचर, वीडियो और अन्य साक्ष्य कई बार अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए गए, लेकिन जांच और कार्रवाई के बजाय 19 जून को शिकायत को बंद करा दिया गया।
ग्रामीणों ने खुली चुनौती देते हुए कहा है कि संबंधित अधिकारी मौके पर आकर दिखाएं कि जिन कार्यों के नाम पर भुगतान निकाला गया, वे कार्य धरातल पर कहां मौजूद हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि खेत तालाब, निर्माण कार्य और भुगतान से जुड़े कई मामलों में रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति में भारी अंतर दिखाई देता है। उनका कहना है कि यदि सब कुछ सही है तो फिर स्वतंत्र जांच कराने में परेशानी क्या है?
क्या सिर्फ आंकड़े सुधारने का खेल?
जिले में यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि कई विभागों में समस्याओं का समाधान करने के बजाय CM हेल्पलाइन के लंबित मामलों का बोझ कम करने और आंकड़े सुधारने के लिए शिकायतों को जल्दबाजी में बंद किया जा रहा है।
यदि ऐसा है तो यह केवल शिकायतकर्ता के साथ अन्याय नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री तक पहुंचने वाली वास्तविक समस्याओं को दबाने का भी मामला माना जाएगा।
जनता का आरोप: अधिकारियों पर दबाव, जनता पर अन्याय
ग्रामीणों का आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारी अपने ऊपर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए बिना समुचित जांच-पड़ताल के शिकायतों को बंद करा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि भ्रष्टाचार के दस्तावेज और शिकायतकर्ता की आपत्तियां मौजूद हैं, तो फिर जांच के बजाय निराकरण कैसे मान लिया जाता है?
जनता का कहना है कि ऐसे मामलों में फर्जी या भ्रामक रिपोर्ट भेजने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
जनता पूछ रही है ये बड़े सवाल
बिना शिकायतकर्ता की सहमति शिकायत क्यों बंद हुई?
बिना फोन, बिना सत्यापन और बिना समाधान निराकरण कैसे मान लिया गया?
क्या शिकायतों को कागजों में निपटाकर आंकड़े चमकाए जा रहे हैं।
बौहारा पंचायत के कथित भ्रष्टाचार की स्वतंत्र जांच कब होगी?
शिकायत बंद करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या नहीं?
यदि शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं था तो निराकरण किस आधार पर स्वीकार किया गया?
क्या शासन तक पहुंचने वाली वास्तविक शिकायतों को बीच रास्ते में ही दबाया जा रहा है?
स्वतंत्र जांच की मांग तेज
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, लोकायुक्त, संभागायुक्त और कलेक्टर भिण्ड से मांग की है कि जिले में पिछले एक वर्ष के दौरान बंद की गई CM हेल्पलाइन शिकायतों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिकायतों का वास्तविक समाधान नहीं होगा और केवल पोर्टल पर निराकरण दिखाकर मामलों को बंद किया जाता रहेगा, तो जनता का विश्वास पूरी व्यवस्था से उठ जाएगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन इन गंभीर आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या शिकायत निवारण व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराकर जनता का भरोसा बहाल कर पाता है या नहीं।
जिले के एक दर्जन से अधिक गांव से मिल रही है जानकारी लोगों के द्वारा बताया जा रहा है कि बिना निराकरण किए हुए हमारी शिकायतों को बंद किया गया ना कोई फोन ना कोई संपर्क सीधा हमारी शिकायतों को बंद कर दिया गया जबकि हमारी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ आज दिन तक।
अरविंद सिंह जादौन
