शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और रसूख का एक ऐसा घालमेल सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गोहद के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) श्याम किशोर भारद्वाज एक बार फिर चौतरफा विवादों और सुर्खियों में हैं। नियम विरुद्ध तरीके से कुर्सी हथियाने से लेकर भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों तक, भारद्वाज का 'विवादों से नाता' बेहद पुराना और गहरा है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कौन सा ऐसा 'जादुई रसूख' है, जिसके आगे भोपाल से लेकर भिंड तक का पूरा प्रशासनिक अमला बेबस नजर आ रहा है?
*मेहगांव से गोहद तक... भ्रष्टाचार के संगीन आरोप..*
दावा किया जा रहा है कि श्याम किशोर भारद्वाज ने प्रशासनिक सिस्टम को गुमराह कर और नियमों को ताक पर रखकर BEO की कुर्सी हासिल की। इससे पहले जब वे मेहगांव में तत्कालीन BEO थे, तब भी उन पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगे थे। उनके कारनामों की गूंज भिंड से लेकर राजधानी भोपाल के गलियारों तक सुनाई दे चुकी है।
*2019 से 'कोमा' में है जांच, बस्ते में बंद हैं सरकारी आदेश.....*
शिकायतकर्तओं की लगातार कोशिशों के बाद भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भारद्वाज के खिलाफ एक नहीं, बल्कि कई बार जांच पत्र जारी किए गए। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि साल 2019 से लेकर आज तक (पिछले कई सालों में) उनके खिलाफ एक भी मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो सकी। तगड़ी राजनीतिक पकड़ और ऊंचे रसूख के चलते हर जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
*बड़ा सांठगांठ का आरोप...*
सुगबुगाहट है कि जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) आर.डी. मित्तल और बीईओ भारद्वाज के बीच 'मधुर संबंध' इतने गहरे हैं कि भोपाल से आने वाले कड़े से कड़े जांच पत्र भी DEO ऑफिस की चौखट लांघते ही फाइलों में कैद हो जाते हैं। DEO ऑफिस मानो अधिकारी के लिए अभेद्य कवच बन चुका है।
*एक बार फिर आर-पार के मूड में शिकायतकर्ता..*
भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले शिकायतकर्ता अब हार मानने को तैयार नहीं हैं। व्यवस्था से त्रस्त होकर तमाम शिकायतकर्ता एक बार फिर एकजुट हो चुके हैं। इस बार आर-पार की लड़ाई की तैयारी है और इस गठजोड़ को बेनकाब करने का पूरा मन बना लिया गया है।
अरविंद सिंह जादौन
