नब्बे दिवसीय गहन विधिक जागरूकता एवं जनसंपर्क अभियान के तहत मंगलवार को पाकुड़िया प्रखंड सभागार में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आम लोगों को उनके कानूनी अधिकारों, बच्चों की सुरक्षा तथा सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम में बाल विवाह, बाल श्रम, बाल संरक्षण, बच्चों के शिक्षा एवं विकास के अधिकार, महिला एवं बाल सुरक्षा से संबंधित विभिन्न कानूनों की विस्तृत जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। समाज के प्रत्येक वर्ग को इस कुरीति के खिलाफ आगे आकर जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने उपस्थित लोगों को बाल श्रम निषेध कानून, किशोर न्याय अधिनियम, बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम तथा अन्य महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए किसी भी प्रकार के बाल अधिकार हनन की सूचना तत्काल संबंधित विभागों को देने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान सकारात्मक अभिभावकत्व (पॉजिटिव पैरेंटिंग) के महत्व पर भी चर्चा की गई। अभिभावकों से बच्चों के सर्वांगीण विकास, शिक्षा और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया। साथ ही बच्चों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने और उनके अधिकारों की रक्षा करने का संदेश दिया गया।
अभियान के अंत में उपस्थित अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण की शपथ ली। सभी ने संकल्प लिया कि वे अपने क्षेत्र में बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएंगे तथा लोगों को कानूनी और सामाजिक रूप से जागरूक करेंगे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, महिला समूहों की सदस्याएं, छात्र-छात्राएं एवं विभिन्न विभागों के कर्मी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने कहा कि जागरूकता ही सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है और इस तरह के अभियान समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में
महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संवादाता जगबंधु पाल
