शिक्षा की दहाड़: वट्टी कुंदा के बच्चों ने रचा प्रेरणादायी इतिहास, 19 नन्हें सितारों का हुआ भव्य सम्मान
कोंडागांव। "शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो जितना पीएगा उतना दहाड़ेगा।" यह केवल एक प्रेरक कथन नहीं, बल्कि वट्टी कुंदा के बच्चों द्वारा साकार की जा रही एक जीवंत हकीकत है। शिक्षा, एकता, अनुशासन और दूरदर्शिता के बल पर जय बुढ़ालपेन वट्टी कुंदा समिति, चिचाड़ी (फरसगांव) ने ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो आज अनेक परिवारों और समुदायों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।
वर्ष 2015 में समिति की स्थापना के साथ ही यह संकल्प लिया गया था कि वट्टी कुंदा का प्रत्येक बच्चा शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़े, अपनी प्रतिभा का विकास करें और भविष्य में परिवार एवं समाज का नाम रोशन करें। इसी उद्देश्य को लेकर समिति के बच्चों, युवाओं, कर्मचारियों, व्यवसायियों और परिवार के सदस्यों ने मिलकर एक अनूठी बचत एवं सहयोग योजना की शुरुआत की। इस योजना के अंतर्गत 10 वर्ष के ऊपर आयु के प्रत्येक सदस्य से ₹20 प्रतिमाह, व्यवसायी वर्ग से ₹50 प्रतिमाह तथा कर्मचारी वर्ग से ₹100 प्रतिमाह स्वैच्छिक सहयोग राशि जमा की जाने लगी। यह राशि प्रत्येक माह नियमित बैठक में पारदर्शी रूप से संकलित की जाती रही। वर्षों तक निरंतर चले इस सामूहिक प्रयास का परिणाम है कि आज समिति के पास ₹1,26,782 (एक लाख छब्बीस हजार सात सौ बियासी रुपये) की संचित पूंजी उपलब्ध है।
विशेष बात यह है कि इस राशि को सुरक्षित रखते हुए दूसरे को ऋण देकर उससे प्राप्त ब्याज का उपयोग शिक्षा एवं समाजहित के कार्यों में किया जा रहा है। वर्ष 2026 का यह सम्मान समारोह भी ब्याज राशि से आयोजित किया गया, जो समिति के बच्चों और सदस्यों की दूरदर्शिता, आर्थिक अनुशासन और आत्मनिर्भर सोच का उत्कृष्ट उदाहरण है।
2025 में रखी गई थी समाज का गौरव सम्मान की शुरुआत, 2026 में बढ़ा कारवां
समिति द्वारा वर्ष 2025 में पहली बार बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कुल 12 विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह, गोंडी भाषा की किताब देकर सम्मानित किया गया था। उस समय यह एक छोटे प्रयास के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन उसके सकारात्मक परिणामों ने बच्चों और वट्टी कुंदा के सदस्यों में शिक्षा के प्रति नई चेतना का संचार किया।
सम्मान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की सफलता ने अन्य बच्चों को भी प्रेरित किया। परिणामस्वरूप पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ी, प्रतिस्पर्धा की स्वस्थ भावना विकसित हुई और अभिभावकों में बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने का उत्साह बढ़ा।
इसी प्रेरणा का परिणाम है कि वर्ष 2026 में सम्मानित विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर 19 हो गई, जिनमें 04 बालक एवं 15 बालिकाएं शामिल हैं। यह उपलब्धि दर्शाती है कि वट्टी कुंदा के परिवारों में शिक्षा के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है तथा बालिका शिक्षा को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है।
19 नन्हें सितारों का हुआ सम्मान
दिनांक 26 जून 2026 को आयोजित "समाज का गौरव सम्मान समारोह" में गोयहा वट्टी कुंदा के उन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने 5वीं, 8वीं, 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के साथ-साथ स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर सफलता प्राप्त की।
इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायत चिचाड़ी के अंतर्गत आने वाले पांच प्राथमिक एवं तीन माध्यमिक विद्यालयों के उन विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया जिन्होंने अपनी कक्षाओं में प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त किया। साथ ही पंचायत क्षेत्र के उन विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया जिन्होंने हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी बोर्ड परीक्षाओं में 80 प्रतिशत अथवा उससे अधिक अंक अर्जित किए।
सभी विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह एवं गोंडी भाषा अध्ययन पुस्तक प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल पुरस्कार वितरण नहीं था, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और पीढ़ियों के बीच ज्ञान के हस्तांतरण का एक भावनात्मक और प्रेरणादायी अवसर भी था।
शिक्षा के साथ संस्कृति संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक शिक्षा समय की आवश्यकता है, लेकिन अपनी मातृभाषा, संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों को गोंडी भाषा अध्ययन पुस्तक भेंट की गई, ताकि नई पीढ़ी शिक्षा के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ी रहे।
वक्ताओं ने विद्यार्थियों को अपनी वक्तव्य में कहा कि कोई भी लक्ष्य निर्धारित करो, लक्ष्य से भटको मत और खूब मेहनत करो, सपने ऐसा देखो जो सोने नहीं देता हो, पढ़ाई के प्रति जुनून हो फिर सफलता अपने आप तुम्हारे पास आएगा, मार्गदर्शन एवं सहयोग करने के लिए हम तुम्हारे साथ सदैव हैं।
अतिथियों ने बढ़ाया कार्यक्रम का गौरव
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. जीवन लाल सलाम (असिस्टेंट प्रोफेसर एवं संभागीय अध्यक्ष, सर्व आदिवासी समाज) रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. चैनू नयताम (प्रोफेसर एवं प्रमुख वैज्ञानिक, दुर्ग) तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता तिरूमाल समरथ वट्टी, भूतपूर्व सरपंच ने की।
अतिथियों एवं वट्टी परिवार के वरिष्ठ सियानों के करकमलों से विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह एवं गोंडी भाषा पुस्तक प्रदान की गई। इस दौरान उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
वट्टी कुंदा के बच्चों का संदेश
कार्यक्रम के दौरान बच्चों एवं समिति के सदस्यों ने एक स्वर में संदेश दिया—
"थोड़ा कम खाएं, लेकिन बच्चों को अवश्य पढ़ाएं।"
"नशापान से दूर रहें, शिक्षा को जीवन का आधार बनाएं।"
"पढ़ाई के साथ अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को भी सहेजकर रखें।"
सामूहिक प्रयास की ऐतिहासिक सफलता
कार्यक्रम के अंत में समिति के संस्थापक, संरक्षक एवं पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों, अभिभावकों, सहयोगकर्ताओं एवं समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आज जो उपलब्धि दिखाई दे रही है, वह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि वट्टी कुंदा के प्रत्येक सदस्य के त्याग, समर्पण, अनुशासन और सहयोग का परिणाम है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में यह अभियान और अधिक मजबूत होगा तथा शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक सहयोग और प्रतिभा प्रोत्साहन के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा।
वास्तव में, वट्टी कुंदा के बच्चों द्वारा शुरू किया गया यह प्रयास आज एक प्रेरणादायी आंदोलन का रूप ले चुका है। यह साबित करता है कि जब बच्चे, युवा और परिवार एक लक्ष्य लेकर संगठित होते हैं, तब सीमित संसाधन भी असाधारण उपलब्धियों का आधार बन जाते हैं।

