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हमीरगढ़ जनसुनवाई में विकास और समाधान के बड़े फैसले, सामुदायिक भवन, उप जिला अस्पताल, जल संरक्षण व दिव्यांग सहायता पर प्रशासन के त्वरित निर्देश.........NN81



हमीरगढ़ एसडीएम कार्यालय में बुधवार को आयोजित जनसुनवाई में आमजन की समस्याओं के समाधान को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। क्षेत्रीय विधायक लादूलाल पितलिया एवं जिला कलेक्टर ने लोगों की समस्याएं सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक निर्देश दिए। रायपुर, सहाड़ा और गंगापुर के बाद हमीरगढ़ पहुंची प्रशासनिक टीम ने जनहित से जुड़े मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।


जनसुनवाई में लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी शिक्षा विभाग की भूमि को ग्रामवासियों की सुविधा के लिए सामुदायिक भवन निर्माण हेतु उपयोग में लेने का निर्णय किया गया। इससे क्षेत्रवासियों को सामाजिक और सार्वजनिक आयोजनों के लिए बेहतर सुविधा मिल सकेगी।


उप जिला अस्पताल के प्रस्तावित स्थान को लेकर भी अहम चर्चा हुई। ग्रामीणों ने बताया कि गंगरार सीमा के निकट प्रस्तावित अस्पताल हमीरगढ़ से दूर होने के कारण आमजन को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा। इस पर जिला कलेक्टर ने तहसीलदार को हमीरगढ़ के नजदीक उपलब्ध सरकारी भूमि का परीक्षण कर नियमानुसार अस्पताल निर्माण की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए।


विधायक लादूलाल पितलिया ने कहा कि जनसुनवाई का उद्देश्य केवल शिकायतें सुनना नहीं, बल्कि उनका प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टर की मौजूदगी में जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हुआ है और सामुदायिक भवन व उप जिला अस्पताल जैसे फैसले सीधे आमजन के हित से जुड़े हैं।


पूर्व उपप्रधान एवं पूर्व मंडल अध्यक्ष सुवाणा भोपाल सिंह पुरावत ने भी क्षेत्र की विभिन्न समस्याएं प्रशासन के समक्ष रखीं। उन्होंने बताया कि देवली पंचायत जैसे छोटे क्षेत्र में पिछले सवा दो वर्षों में करीब 26 करोड़ रुपये के विकास कार्य स्वीकृत हुए हैं और कई कार्य प्रगति पर हैं। पुरावत ने जल संरक्षण से जुड़े मुद्दे उठाते हुए करीब 800 वर्ष पुरानी बावड़ी, धर्म नाड़ी, अन्य नाड़ियों तथा वर्ष 1996 में बने एनीकट की मरम्मत की मांग रखी, जिस पर जिला कलेक्टर ने आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।


जनसुनवाई में जर्जर हो चुके राजोला मिडिल स्कूल सहित अन्य विद्यालय भवनों के लिए डीएमएफटी योजना के तहत नए कमरों की स्वीकृति देने पर भी सहमति बनी।


मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा एक मामला भी जनसुनवाई में सामने आया। आर्थिक रूप से कमजोर सत्तू सोहन प्रजापत, जिनके दोनों हाथ करंट हादसे में चले गए थे, उनके लिए इलेक्ट्रिक स्कूटी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए।


श्मशान भूमि पर अतिक्रमण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। प्रशासन ने तहसीलदार को तत्काल अतिक्रमण हटाकर भूमि पंचायत को सुपुर्द करने के निर्देश दिए।


हमीरगढ़ की यह जनसुनवाई केवल शिकायतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाधान, संवेदनशीलता और विकास के ठोस निर्णयों का प्रभावी मंच बनकर सामने आई।

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