डॉ. डूंकवाल ने जल संरक्षण तकनीकी अपना कर गुणवत्तापूर्ण खेती करने, रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाने की आवश्यकता जताई ताकि ग्राम स्वराज का सपना साकार हो सके। उन्होंने श्रीअन्न एवं सहजन के औषधीय गुणों पर विस्तार से चर्चा की।
डॉ. प्रताप सिंह कुलगुरू महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर ने वर्षा जल संग्रहण एवं संचयन के महत्त्व पर चर्चा करते हुए बताया कि किसान भाई किस प्रकार वर्षा के जल का संग्रहण कर सदुपयोग करें। डॉ. सिंह ने जल संरक्षण हेतु फार्म पोण्ड बनाने एवं निर्मित जल स्रोतों का जीर्णोद्धार करने पर जोर दिया।
केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सी.एम. यादव ने केन्द्र की गतिविधियों से रूबरू करवाते हुए किसानों को केंद्र के निरन्तर संपर्क में रहकर व्यावसायिक खेती करने की आवश्यकता जताई। अधीक्षण अभियन्ता रामराज मीणा ने खेती में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली अपनाकर जल बचाने पर जोर दिया। स्वरूपगंज के सरपंच प्यारे लाल शर्मा ने कृषि में जैव उर्वरकों का उपयोग करने मानव जीवन को बीमारियों से बचाने की आवश्यकता जताई।
कार्यक्रम में प्रगतिशील कृषक नरेन्द्र कोहला एवं रामसिंह राणावत ने पीले तरबूज एवं बेबीकॉर्न की खेती कर अधिक आमदनी प्राप्त करने के तरीके साझा किए।
प्रशिक्षण में खैराबाद के सरपंच गिरधारी लाल भील, वरिष्ठ अनुसंधान अध्येता डॉ. लालचंद कुमावत, लेखाधिकारी अजीत सिंह राठौड़ ने केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा किसानों हेतु संचालित योजनाओं की जानकारी देते हुए लाभ लेने की आवश्यकता जताई।
प्रशिक्षण में सुवाणा पंचायत समिति के 30 कृषक एवं कृषक महिलाओं ने भाग लिया जिन्हें विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित कृषि कैलेण्डर एवं सहजन की पौध प्रदर्शन के रूप में दिए गए।
