संवाददाता ;
सेवा पवार
गडचिरोली, महाराष्ट्र
‘दिशा अभियान’ के अंतर्गत विशेष शिक्षकों का सम्मान।
गडचिरोली, 9 अक्टूबर:
बौद्धिक रूप से दिव्यांग विद्यार्थियों का दैनिक जीवन सुलभ हो और समाज में उनका आवागमन सहज तथा सम्मानपूर्वक हो, इसके लिए विशेष शिक्षकों को संवेदनशीलता के साथ कार्य करना चाहिए। इन विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए, ऐसा आह्वान जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास गाडे ने किया।
शासन स्तर पर बौद्धिक रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष पाठ्यक्रम संचालित करने वाले ‘दिशा अभियान’ के माध्यम से चयनित विशेष शिक्षकों का आज जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के कार्यालय में सत्कार किया गया। इस अवसर पर सुहास गाडे ने शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। इन शिक्षकों को दिव्यांग सशक्तीकरण विभाग के आयुक्त और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के हस्ताक्षरयुक्त प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया।
दिव्यांग सशक्तीकरण विभाग के सहायक आयुक्त चेतन हिवंज ने दिशा अभियान के कार्यों की समीक्षा की। इस अभियान को केवल विभाग के स्कूलों तक ही सीमित न रखकर इसका दायरा बढ़ाया जाना चाहिए। सभी स्कूलों के बौद्धिक रूप से दिव्यांग विद्यार्थियों को भी इस विशेष पाठ्यक्रम का लाभ मिलना चाहिए, ऐसी अपेक्षा उन्होंने अभियान चलाने वाली ‘जय वकील फाउंडेशन एंड रिसर्च सेंटर, मुंबई’ संस्था से व्यक्त की।
कार्यक्रम का संयोजन दिशा अभियान के समन्वयक अभय रोटे और निलेश तोरे ने किया। इस अवसर पर बौद्धिक रूप से दिव्यांग विद्यार्थियों के स्कूलों के विशेष शिक्षक उपस्थित थे।

