संवाददाता- ऐश्वर्य सुमित मिश्रा
सिवनी। PACL Ltd. से संबंधित भूमि विवाद में सिवनी के संजय भारद्वाज के पक्ष में महत्वपूर्ण आदेश सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में SEBI अधिनियम की धारा 28A के तहत गठित पैनल ऑफ रिकवरी ऑफिसर्स ने 17 अगस्त 2026 को संजय भारद्वाज एवं उनके पुत्र रूपेश भारद्वाज (राजा) की ओर से प्रस्तुत इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन पर अंतिम आदेश पारित किया। दस्तावेजों के विस्तृत परीक्षण के बाद पैनल ने संजय भारद्वाज की कुल 9.98 हेक्टेयर तथा रूपेश भारद्वाज(राजा) की 6.79 हेक्टेयर भूमि पर किए गए दावे को स्वीकार करते हुए पूर्व में पारित आदेश को संबंधित संपत्तियों की सीमा तक अलग रखने योग्य माना।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद रिकवरी अधिकारियों के समक्ष पहुंचा मामला
PACL Ltd. के विरुद्ध SEBI की कार्रवाई और उसके बाद शुरू हुई रिकवरी प्रक्रिया में PACL से संबंधित संपत्तियों की पहचान एवं उन पर प्राप्त आपत्तियों के निराकरण की प्रक्रिया चली। दस्तावेज के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी 2016 को PACL द्वारा खरीदी गई भूमि के संबंध में समिति गठित करने का निर्देश दिया था। बाद में 15 नवंबर 2017 के आदेश के तहत PACL संपत्तियों से संबंधित शिकायतों एवं आपत्तियों के लिए तत्कालीन जिला न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) को जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के 8 अगस्त 2024 और 19 फरवरी 2026 के आदेशों के अनुपालन में लंबित आपत्तियां रिकवरी अधिकारियों के समक्ष लाई गईं।
इसी क्रम में संजय भारद्वाज और उनके पुत्र रूपेश भारद्वाज(राजा) ने अपनी भूमि को PACL से असंबंधित बताते हुए अटैचमेंट से मुक्त किए जाने की मांग की।
संजय भारद्वाज की 9.98 हेक्टेयर भूमि पर था विवाद
रिकॉर्ड के अनुसार संजय भारद्वाज ने खसरा नंबर 716, 719, 721, 722 एवं 726 से संबंधित कुल 9.98 हेक्टेयर भूमि के संबंध में दावा प्रस्तुत किया था। इसमें ग्राम मारबोडी, तहसील एवं जिला सिवनी की भूमि शामिल है। वहीं रूपेश भारद्वाज ने ग्राम मारबोड़ी स्थित खसरा नंबर 465, 520, 525, 559, 562, 565, 566 एवं 570 की कुल 6.79 हेक्टेयर भूमि के संबंध में दावा किया था।
इससे पहले जिला न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) ने 22 फरवरी 2024 को आपत्ति खारिज कर दी थी। उस समय PACL की ओर से वर्ष 2006 के GPA और Agreement to Sell (ATS) को आधार बनाते हुए भूमि को PACL से संबंधित बताया गया था। इस आदेश से असंतुष्ट संजय एवं रूपेश भारद्वाज ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन के माध्यम से चुनौती दी।
पंजीकृत विक्रय विलेख और राजस्व रिकॉर्ड बने अहम आधार
आवेदकों की ओर से पैनल के समक्ष पंजीकृत विक्रय विलेख, म्यूटेशन आदेश, बैंक स्टेटमेंट, किसान क्रेडिट लोन से संबंधित दस्तावेज, बैंक टाइटल सर्च रिपोर्ट, जमाबंदी तथा अन्य राजस्व दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। पैनल ने इन सभी दस्तावेजों का परीक्षण किया।
रिकॉर्ड के मुताबिक संजय भारद्वाज ने संबंधित भूमि 20 फरवरी 2014 के पंजीकृत विक्रय विलेख के माध्यम से संगीता कपूर से खरीदी। विक्रय प्रतिफल में बैंकिंग माध्यम से भुगतान के साथ नकद भुगतान का भी उल्लेख है। पैनल ने बैंक स्टेटमेंट की प्रविष्टियों को भी रिकॉर्ड पर लिया और पाया कि खरीद के भुगतान का एक हिस्सा बैंकिंग चैनल के माध्यम से किया गया था।
राजस्व रिकॉर्ड में भी संगीता कपूर का स्वामित्व दर्ज मिला
पैनल ने 30 मई 2013 के तहसीलदार, सिवनी के म्यूटेशन आदेशों तथा पटवारी रिपोर्ट का परीक्षण किया। इन रिकॉर्डों से संबंधित भूमि पर संगीता कपूर के पूर्व स्वामित्व की पुष्टि हुई। बाद में पंजीकृत विक्रय विलेख के माध्यम से भूमि संजय भारद्वाज के नाम आई। 31 मई 2014 के संशोधन आदेश के बाद संजय भारद्वाज का नाम संबंधित खसरों में स्वामी एवं भूमिधारी के रूप में दर्ज होने तथा उनके कब्जे में भूमि होने का भी उल्लेख आदेश में है।
GPA और ATS से स्वामित्व हस्तांतरण नहीं हुआ
पैनल ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि केवल GPA अथवा अपंजीकृत Agreement to Sell के आधार पर अचल संपत्ति का स्वामित्व हस्तांतरित नहीं होता। संपत्ति के वास्तविक हस्तांतरण के लिए विधि के अनुसार पंजीकृत विक्रय विलेख आवश्यक है। पैनल ने माना कि 28 जुलाई 2006 के GPA और अपंजीकृत ATS से PACL अथवा उससे संबद्ध किसी संस्था के पक्ष में संबंधित संपत्तियों का कोई वैध स्वामित्व, अधिकार या हित हस्तांतरित नहीं हुआ।
PACL से लेन-देन का कोई लिंक नहीं मिला
मामले के सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष में पैनल ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों—जमाबंदी, म्यूटेशन आदेश, टाइटल सर्च रिपोर्ट और अन्य रिकॉर्ड—के परीक्षण में संबंधित संपत्तियों के लेन-देन का PACL अथवा उसकी सहयोगी संस्थाओं से कोई लिंक नहीं मिला। पैनल के अनुसार भूमि पहले संगीता कपूर के स्वामित्व में थी और बाद में पंजीकृत विक्रय विलेखों के माध्यम से आवेदकों को हस्तांतरित हुई। बैंक स्टेटमेंट भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि संपत्तियां स्वतंत्र रूप से खरीदी गईं।
संजय भारद्वाज को वास्तविक खरीदार माना
पैनल ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संजय भारद्वाज एवं रूपेश भारद्वाज को उचित मूल्य पर भुगतान करने वाले वास्तविक खरीदार माना, अर्थात वास्तविक प्रतिफल देकर स्वतंत्र रूप से संपत्ति खरीदने वाले खरीदार माना। आदेश में यह भी कहा गया कि केवल इस आधार पर कि भुगतान का कुछ हिस्सा नकद था, पंजीकृत विक्रय विलेख, राजस्व रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों से प्रमाणित लेन-देन को गैर-वास्तविक या अवैध नहीं माना जा सकता।
17 अगस्त 2026 को अंतिम आदेश, दोनों आवेदनों को मंजूरी
अंततः मुंबई में 17 अगस्त 2026 को SEBI के पैनल ऑफ रिकवरी ऑफिसर्स—क्षमा पी. वाघेरकर, रेशमा गोयल और सरोज कुमार साहू—द्वारा आदेश पारित किया गया। आदेश के पैरा 35 में संजय भारद्वाज की 9.98 हेक्टेयर और रूपेश भारद्वाज(राजा) की 6.79 हेक्टेयर भूमि से संबंधित इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन को स्वीकार करते हुए उन्हें राहत प्रदान की गई।
इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत हुई कार्यवाही में दस्तावेजों की जांच के बाद संजय भारद्वाज के पक्ष में महत्वपूर्ण राहत सामने आई है। आदेश ने संबंधित भूमि के PACL से संबंध को दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर स्वीकार नहीं किया और संजय भारद्वाज और राजा भारद्वाज को संबंधित संपत्तियों का स्वतंत्र एवं वास्तविक खरीदार माना।
सिवनी में स्थानीय निवासियों से PACL द्वारा बॉन्ड के माध्यम से जुटाई गई निवेश राशि से लगभग 7000 एकड़ भूमि खरीदी गई। बाद में इन जमीनों को बंधक रखकर अतिरिक्त धन जुटाने तथा अन्य शहरों के निवेशकों को हिस्सेदारी/प्लॉट देने का आरोप सामने आया। स्थानीय राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण और वैध रजिस्ट्री को लेकर भी विवाद रहा।
वर्ष 2016 में CBI की कार्रवाई के बाद संबंधित संपत्तियां जब्ती एवं आगे की कानूनी प्रक्रिया में आईं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और लोढ़ा समिति/SEBI एम्पावर्ड कमेटी की प्रक्रिया के तहत संपत्तियों के दावों का परीक्षण किया गया। सिवनी के वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप सिंह बैस के सहयोग से संजय भारद्वाज और रूपेश भारद्वाज(राजा) ने सुप्रीम कोर्ट एवं SEBI एम्पावर्ड कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रखा, जहां उपलब्ध विवरण के अनुसार उनके पक्ष में निर्णय आया और संबंधित 9.98 और 6.79 हेक्टेयर भूमि पर उनका दावा स्वीकार किया गया।

