चार माह से मानदेय लंबित: समनापुर के रोजगार सहायकों का ऐलान—"भुगतान नहीं तो काम नहीं" :
डिंडोरी/समनापुर। जनपद पंचायत समनापुर में चार माह से लंबित मानदेय को लेकर ग्राम रोजगार सहायकों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। रोजगार सहायक संगठन ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक लंबित मानदेय का भुगतान नहीं होता और ग्राम रोजगार सहायकों के स्थापना संबंधी कार्य किसी अन्य अधिकारी को नहीं सौंपे जाते, तब तक वे अपने कार्यक्षेत्र में कार्य करने में असमर्थ रहेंगे।
रोजगार सहायकों का कहना है कि फरवरी माह से अब तक मानदेय का भुगतान नहीं होने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है। नियमित रूप से मनरेगा, पंचायतों के विकास कार्य, ऑनलाइन प्रविष्टियां और शासन की विभिन्न योजनाओं का संचालन करने के बावजूद उन्हें समय पर मानदेय नहीं मिल रहा है। इससे परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक आवश्यकताओं का खर्च उठाना कठिन हो गया है।
संगठन का आरोप है कि कई बार अधिकारियों के समक्ष मानदेय भुगतान की मांग रखी गई, लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। इससे रोजगार सहायकों में गहरा असंतोष व्याप्त है। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक लंबित मानदेय का भुगतान नहीं किया जाता तथा सहायक लेखा अधिकारी शेरखान से ग्राम रोजगार सहायकों के स्थापना संबंधी कार्य किसी अन्य अधिकारी को नहीं सौंपे जाते, तब तक संगठन अपने नियमित कार्यों से विरत रहेगा।
रोजगार सहायकों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो "वेतन नहीं तो काम नहीं" आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। इसके कारण यदि मनरेगा एवं अन्य शासकीय योजनाओं का संचालन प्रभावित होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
प्रमुख मांगें :
चार माह से लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान।
भविष्य में प्रत्येक माह समय पर मानदेय जारी करने की व्यवस्था।
ग्राम रोजगार सहायकों की समस्याओं का स्थायी समाधान।
स्थापना संबंधी कार्यों का निष्पक्ष एवं पारदर्शी संचालन सुनिश्चित किया जाए।

