रिपोर्टर: मुकेश विश्वकर्मा
पालघर जिले के वसई ईस्ट के तुंगारफाटा इलाके से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो स्थानीय प्रशासन के सड़क रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सरकारी स्कूल से महज करीब 30 मीटर की दूरी पर सड़क पर बड़ा गड्ढा बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गड्ढा काफी समय से मौजूद है और कई लोग इसमें गिरकर घायल भी हो चुके हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि इसी रास्ते से छोटे-छोटे बच्चे स्कूल आते-जाते हैं। ऐसे में किसी बड़े हादसे का खतरा लगातार बना हुआ है।
इस वक्त मैं मौजूद हूं पालघर जिले के वसई ईस्ट के तुंगारफाटा इलाके में। कैमरे पर दिखाई दे रहा यह गड्ढा कोई छोटा-मोटा गड्ढा नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों के मुताबिक लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बना हुआ है।
सबसे गंभीर बात यह है कि यहां से महज करीब 30 मीटर की दूरी पर एक सरकारी स्कूल है। यानी जिस रास्ते से रोजाना बच्चे और उनके अभिभावक गुजरते हैं, उसी रास्ते पर यह बड़ा गड्ढा मौजूद है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई लोग इस गड्ढे में गिर चुके हैं। आने-जाने वाले दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को काफी परेशानी होती है।
बारिश के दौरान स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है, क्योंकि पानी भरने के बाद गड्ढे की गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है।
जनता का सवाल
अब सवाल यह है कि आखिर इस सड़क की जिम्मेदारी किसकी है?
अगर सड़क की मरम्मत के लिए बजट और प्रशासनिक प्रक्रिया होती है, तो जमीन पर उसका असर कब दिखाई देगा?
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
स्थानीय लोगों की मांग है कि इस गड्ढे को जल्द से जल्द भरा जाए और सड़क की स्थायी मरम्मत की जाए, ताकि बच्चों, बुजुर्गों, पैदल राहगीरों और वाहन चालकों को सुरक्षित रास्ता मिल सके।
प्रशासन से सवाल
वसई-विरार शहर महानगरपालिका की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार नागरिक सड़क एवं बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। महानगरपालिका के PWD विभाग की जिम्मेदारियों में नागरिकों की बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी समस्याओं का समाधान करना भी शामिल है।
इसलिए अब देखना होगा कि तुंगारफाटा के इस गड्ढे को लेकर प्रशासन कितनी जल्दी कार्रवाई करता है।
स्थानीय लोगों की मांग साफ है—
गड्ढा तुरंत भरा जाए।
सड़क की स्थायी मरम्मत की जाए।
स्कूल के आसपास बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो, इसकी व्यवस्था की जाए।
फिलहाल सवाल यही है—
क्या प्रशासन किसी हादसे का इंतजार कर रहा है, या फिर समय रहते इस समस्या का समाधान किया जाएगा?

