वित्तीय प्रभार के इंतजार में पंचायतें बेबस: समनापुर में सचिवों के स्थानांतरण के बाद विकास कार्यों पर लगा ब्रेक :
डिंडोरी/समनापुर। जनपद पंचायत समनापुर में सचिवों के स्थानांतरण के बाद कई ग्राम पंचायतों का प्रशासनिक कामकाज अधर में लटक गया है। नए सचिवों ने कार्यभार तो संभाल लिया, लेकिन उन्हें अब तक वित्तीय प्रभार नहीं मिलने से पंचायतों की विकास योजनाएं ठप पड़ गई हैं। निर्माण कार्यों के भुगतान से लेकर मजदूरी, सामग्री क्रय और अन्य आवश्यक खर्चों पर रोक जैसी स्थिति बन गई है।
सूत्रों के नुसार, स्थानांतरण आदेश लागू होने के बावजूद बैंक खातों के संचालन और वित्तीय अधिकारों का विधिवत हस्तांतरण नहीं हो सका है। इसका सीधा असर पंचायतों में चल रहे विकास कार्यों पर पड़ रहा है। कई स्वीकृत कार्य भुगतान के अभाव में रुक गए हैं, जबकि नए कार्य शुरू नहीं हो पा रहे हैं।
बरसात के इस मौसम में सड़क, नाली, पुलिया, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्य प्राथमिकता पर होने चाहिए थे, लेकिन वित्तीय अधिकार लंबित होने से पंचायतें केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित होकर रह गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों की रफ्तार पूरी तरह थम गई है और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सचिवों के स्थानांतरण के आदेश जारी हो चुके हैं, तो आखिर वित्तीय प्रभार देने में देरी किस स्तर पर हो रही है? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है, या फिर फाइलें जानबूझकर रोकी जा रही हैं? यदि समय पर वित्तीय अधिकार नहीं दिए जाते, तो रुके हुए विकास कार्यों और जनता की परेशानियों की जिम्मेदारी किसकी होगी?
अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों पर हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि सभी स्थानांतरित सचिवों को तत्काल वित्तीय प्रभार सौंपा जाए, ताकि पंचायतों का कामकाज सामान्य हो सके और रुके हुए विकास कार्यों को बिना किसी देरी के शुरू कराया जा सके
सचिवों का स्थानांतरण होने के बाद वित्तीय प्रभार क्यों लंबित है
पंचायतों के बैंक खातों का संचालन आखिर किसके अधिकार में है
रुके हुए विकास कार्यों से होने वाले नुकसान की जवाबदेही किसकी होगी
क्या जिला प्रशासन इस समस्या का शीघ्र समाधान करेगा, या ग्रामीणों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा?

