उत्तर प्रदेश के अमरोहा शहर में बिजली घर के पीछे बसी एक छोटी-सी बस्ती के लोगों का कहना है कि उनके लिए बिजली सिर्फ़ एक सुविधा नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी का सबसे बड़ा संघर्ष बन चुकी है।
मोहल्ले के कई परिवार हाल ही में जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और अपनी समस्याओं को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। उनका आरोप है कि आसपास के इलाकों में वर्षों पहले बिजली कनेक्शन और मीटर लग चुके हैं, लेकिन उनकी बस्ती अब भी नियमित बिजली आपूर्ति से वंचित है।
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, गर्मी के दिनों में स्थिति और कठिन हो जाती है। कई घरों में छोटे बच्चे हैं, जबकि एक परिवार में हाल ही में नवजात शिशु का जन्म हुआ है। लोगों का कहना है कि बिना बिजली के पंखे और पानी की व्यवस्था प्रभावित होती है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज़्यादा परेशानी उठानी पड़ती है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि बिजली कनेक्शन दिलाने के नाम पर उनसे अतिरिक्त धनराशि मांगी गई। कुछ निवासियों ने यह भी दावा किया कि विरोध करने पर उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ा। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का जवाब सामने नहीं आया है।
मोहल्ले के लोगों की मांग है कि उनकी शिकायत की निष्पक्ष जांच हो और उन्हें नियमित बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना है कि वे किसी विशेष रियायत की मांग नहीं कर रहे, बल्कि वही सुविधा चाहते हैं जो शहर के अन्य इलाकों को पहले से मिल रही है।
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल बुनियादी सुविधाओं तक समान पहुंच का है। शहर के विकास और आधुनिक जीवन की चर्चा के बीच अमरोहा की यह बस्ती याद दिलाती है कि आज भी कुछ परिवार ऐसे हैं जिनके लिए बिजली का एक बल्ब जलना किसी उपलब्धि से कम नहीं है।
रिपोर्ट मौ। अज़ीम अमरोहा
