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बाल श्रम नहीं, शिक्षा का अधिकार: विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर दुर्ग में विशेष विधिक शिविर आयोजित*............NN81


विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा किशोर न्याय बोर्ड दुर्ग में विशेष विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लीगल एंड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के दो काउंसलर विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने बच्चों को उनके अधिकारों एवं बाल संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी जानकारियाँ प्रदान की।

शिविर के दौरान बच्चों को बाल श्रम की परिभाषा, उसके विभिन्न स्वरूपों तथा बाल श्रम उन्मूलन के महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि बाल श्रम बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं शैक्षणिक विकास में बाधा उत्पन्न करता है तथा उनके उज्ज्वल भविष्य को प्रभावित करता है। वक्ताओं ने बच्चों को बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986, किशोर न्याय से संबंधित प्रावधानों तथा बाल संरक्षण के लिए बनाए गए विभिन्न भारतीय कानूनों की जानकारी भी दी गई।

कार्यक्रम में बच्चों को शासकीय पुनर्वास योजनाओं, शिक्षा के अधिकार तथा बाल संरक्षण तंत्र के बारे में भी अवगत कराया गया। साथ ही चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098, गुड टच एवं बैड टच की जानकारी देकर उन्हें अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। बच्चों ने कार्यक्रम के दौरान उत्साहपूर्वक अनेक प्रश्न पूछे, जिनका काउंसलरों द्वारा सरल एवं सहज भाषा में उत्तर देकर समाधान किया गया।

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के उपलक्ष्य में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया गया। इस अभियान में दुर्ग, भिलाई एवं धमधा क्षेत्र के पैरा लीगल वॉलंटियर्स ने सक्रिय सहभागिता निभाई। च्स्ट टीमों ने गाँवों, शहरों एवं मोहल्लों में पहुँचकर बच्चों, युवाओं, अभिभावकों एवं आमजन को बाल श्रम के दुष्परिणामों तथा इसके विरुद्ध बने कानूनों के बारे में जानकारी प्रदान की।

अभियान के दौरान लोगों को बताया गया कि बाल श्रम केवल कानून का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि बच्चों के मौलिक अधिकारों का हनन भी है। बाल श्रम करवाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कानून में कठोर दंड एवं जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही आमजन को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा उपलब्ध निःशुल्क विधिक सहायता, निःशुल्क अधिवक्ता की सुविधा तथा विभिन्न कानूनी सेवाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा एवं सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है। बाल श्रम मुक्त समाज का निर्माण तभी संभव है जब समाज का प्रत्येक नागरिक इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभाए और बच्चों को श्रम नहीं, बल्कि शिक्षा एवं अवसर प्रदान करे।

अनिल जोशी

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