अमरोहा में इन दिनों एक गांव चर्चा का विषय बना हुआ है। वजह कोई नई परियोजना, सड़क या विकास कार्य नहीं, बल्कि पानी है। इतना पानी कि गांव की सड़कें तालाब जैसी दिखाई देने लगी हैं। मामला रायपुर खुर्द का है, जो कोई दूर-दराज़ का इलाका नहीं, बल्कि कलेक्ट्रेट के सामने बसा गांव है।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के बाद मुख्य मार्ग पर कई फीट तक पानी भर गया है। हालात ऐसे हैं कि लोगों का पैदल निकलना तक मुश्किल हो गया है। बच्चे स्कूल जाने में दिक्कत महसूस कर रहे हैं, बुजुर्ग घरों में कैद होकर रह गए हैं और रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह फेल साबित हुई है। सड़कें अब रास्ता कम और तालाब ज्यादा नजर आती हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिस इलाके में यह समस्या सामने आई है, वह जिला प्रशासन के सबसे अहम कार्यालयों में से एक—कलेक्ट्रेट—के ठीक सामने स्थित है।
ग्रामीणों के बीच चर्चा का एक बड़ा विषय तालाब सौंदर्यीकरण का काम भी है। उनका दावा है कि सौंदर्यीकरण के बाद जलभराव की समस्या कम होने के बजाय और बढ़ गई। लोगों का कहना है कि यदि पानी निकासी की व्यवस्था पर समान रूप से ध्यान दिया जाता तो शायद आज यह स्थिति न बनती।
गांव में शिकायतों की कमी नहीं है। ग्रामीण बताते हैं कि उन्होंने कई बार अपनी समस्या अधिकारियों तक पहुंचाई, लेकिन अब तक उन्हें राहत नहीं मिली। यही वजह है कि लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और वे जिम्मेदार विभागों से जवाब मांग रहे हैं।
रायपुर खुर्द की तस्वीर कई सवाल छोड़ती है। सबसे बड़ा सवाल यही कि जब प्रशासन की नजरों के सामने बसे गांव में जलभराव की समस्या बनी हुई है, तो उन इलाकों का क्या हाल होगा जो शहर और प्रशासनिक केंद्र से काफी दूर हैं?
रिपोर्ट मौ। अज़ीम अमरोहा
