। शासन द्वारा स्वच्छता अभियान और विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन भ्रष्टाचार के कारण कई योजनाएं धरातल पर उतरने से पहले ही कागजों में पूरी दिखा दी जाती हैं। ऐसा ही मामला ग्राम पंचायत परतापुर से सामने आया है।
जानकारी के अनुसार, शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय में बालक एवं बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय निर्माण का कार्य करीब तीन वर्ष पहले रिकॉर्ड में पूर्ण दर्शाया गया है। आरोप है कि निर्माण कार्य के नाम पर लगभग डेढ़ लाख रुपये की पहली किस्त भी आहरित कर ली गई, जबकि विद्यालय परिसर में शौचालय का निर्माण नहीं हुआ। मौके पर शौचालय का कोई अस्तित्व नहीं मिला।
इस बीच गांव की मौली माता महिला समिति ने बच्चों, विशेषकर छात्राओं की समस्या को देखते हुए स्वयं पहल की। समिति की महिलाओं ने घर-घर जाकर ग्रामीणों से आर्थिक सहयोग एकत्र किया और उसी राशि से विद्यालय में शौचालय का निर्माण शुरू कराया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि महिला समिति आगे नहीं आती, तो विद्यार्थियों को खुले में शौच के लिए मजबूर होना पड़ता।
ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तथा सरकारी राशि के उपयोग की जांच की मांग की है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और जनपद पंचायत इस कथित वित्तीय अनियमितता पर क्या कार्रवाई करते हैं।
