*बौहारा पंचायत में भ्रष्टाचार का ‘ब्लैक होल’!*
*फर्जीवाड़े की लंबी फेहरिस्त, फिर भी कार्रवाई शून्य!*
*फर्जी बिल, फर्जी मजदूर, फर्जी तालाब के बाद अब बिना कार्य विवरण वाले बिलों से सरकारी खजाने पर डाका?*
*रौन जनपद बना भ्रष्टाचार का संरक्षण केंद्र?*
*शिकायतों के बाद भी कार्रवाई शून्य*
*जनता पूछ रही — आखिर किसके इशारे पर चल रहा करोड़ों के खेल का नेटवर्क!*
भिंड/भिंड जिले की रौन जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बौहारा में भ्रष्टाचार के आरोप अब इतने गंभीर हो चुके हैं कि ग्रामीण इसे “विकास नहीं, सरकारी धन लूटने का संगठित तंत्र” बताने लगे हैं। पंचायत में पहले फर्जी बिल, फर्जी दस्तावेज, फर्जी मास्टर रोल, फर्जी मजदूर, फर्जी खेत तालाब, बिना काम नाला निर्माण और सीसी रोड निर्माण जैसे मामलों में लाखों रुपए के कथित घोटाले सामने आए, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हुई।
अब भ्रष्टाचार का एक और नया तरीका सामने आया है जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पंचायत में मटेरियल बिलों पर यह तक नहीं लिखा जा रहा कि सामान किस कार्य के लिए खरीदा गया और कहां उपयोग होना है। यानी बिल भी पास, भुगतान भी पास, लेकिन काम कौन सा हुआ — इसका रिकॉर्ड तक नहीं!
*सरकारी पैसा या खुली लूट?*
ग्रामीणों का कहना है कि जब बिलों में कार्य का नाम और स्थान ही दर्ज नहीं, तो आखिर सरकारी राशि किस आधार पर निकाली जा रही है?
*आखिर कौन अधिकारी आंख बंद कर ऐसे बिलों को स्वीकृति दे रहा है?*
लोगों का आरोप है कि पंचायत में अब भ्रष्टाचार छिपाने के लिए नए-नए फॉर्मूले तैयार किए जा रहे हैं। यदि समय रहते पुराने मामलों में कार्रवाई हुई होती, तो आज भ्रष्टाचारियों के हौसले आसमान पर नहीं होते।
*अटैच सचिव भी करता रहा भुगतान!*
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बाद पंचायत सचिव को जनपद कार्यालय में अटैच किया गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अटैच रहते हुए भी कथित रूप से लाखों रुपए के बिल पास किए गए।
अब सवाल यह उठ रहा है कि —
अटैच सचिव किस अधिकार से भुगतान कर रहा था?
और किन अधिकारियों ने उन भुगतानों पर मुहर लगाई?
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि इस पूरे खेल की निष्पक्ष जांच हो जाए तो कई बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
*अब रोजगार सहायक और उपयंत्री पर उंगली*
ग्रामीणों का आरोप है कि पहले सचिव द्वारा किए गए कथित भ्रष्टाचार की लीपापोती के लिए पंचायत का चार्ज पहले से पदस्थ रोजगार सहायक गोविंद सिंह को सौंप दिया गया।
गांव में चर्चा है कि रोजगार सहायक गोविंद सिंह और उपयंत्री सुरजीत मौर्य मिलकर भ्रष्टाचार की नई पटकथा लिख रहे हैं। नए-नए तरीके के बिल, बिना कार्य विवरण के भुगतान और संदिग्ध दस्तावेज इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि पंचायत में सरकारी धन को योजनाबद्ध तरीके से ठिकाने लगाया जा रहा है।
*जनपद से जिला तक सब मौन क्यों?*
ग्रामीणों का कहना है कि जनपद पंचायत से लेकर जिला पंचायत और जनसुनवाई तक कई बार शिकायतें की गईं। दस्तावेज और साक्ष्य अधिकारियों की टेबलों पर रखे गए, लेकिन कार्रवाई आज तक नहीं हुई।
लोगों का आरोप है कि रौन जनपद पंचायत भ्रष्टाचार रोकने का केंद्र नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का अड्डा बनता जा रहा है।
*क्या अधिकारी भ्रष्टाचार रोक रहे हैं या उसका आनंद ले रहे हैं?*
ग्रामीणों का कहना है कि जिले के वरिष्ठ अधिकारी आंखें बंद कर बैठे हैं। शिकायतकर्ता महीनों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं,
लेकिन सिस्टम में बैठे जिम्मेदार लोग कार्रवाई के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं।
लोगों का कहना है कि गरीबों के हक की योजनाओं का पैसा कागजों में खत्म किया जा रहा है और अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय कुर्सी बचाने में लगे हैं।
अब मंत्रियों की साख दांव पर!
ग्रामीणों ने जिला प्रभारी मंत्री पहलाद पटेल और भिंड जिले के कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
अब जनता पूछ रही है —
क्या सरकार भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई करेगी?
क्या फर्जी बिलों का हिसाब होगा?
*क्या बिना काम निकाली गई राशि वापस आएगी?*
क्या भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाले अधिकारी भी जांच के घेरे में आएंगे?
*या फिर यह पूरा मामला भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा?*
*बौहारा पंचायत में विकास कम, भ्रष्टाचार का साम्राज्य ज्यादा?*
गांव में अब यह चर्चा आम हो चुकी है कि पंचायत में विकास कार्यों से ज्यादा कागजों पर खेल चल रहा है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा जनआंदोलन होगा और मामला प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा।
अरविंद सिंह जादौन
