सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सरिया और बरमकेला क्षेत्रों में अवैध डोलोमाइट खनन से सामने आई तस्वीरें विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन का सवाल फिर खड़ा कर रही हैं। ओपन कास्ट खनन से बनी विशाल खदान, का प्रमुख कारण बनता जा रहा है अवैध डोलोमाइट खदान के चारों तरफ जीव जंतु मानव सुरक्षा घेराव के लिए कोई नामोनिशान तक नहीं, जिस तरह से खनन किया जा रहा उसे देखते हुए ऐसा लगता है कि खनिज माफिया खुद नियम तय करते हैं। खनिज नियमों का किसी भी प्रकार का पालन ही नहीं किया रहा है , खदान के पास किसी भी प्रकार का सूचना बोर्ड नहीं है कि यहां पर खदान का गढ्ढा है तथा इसके चपेट में आने से जान तक जा सकता है। बड़ी दुर्घटना कभी भी घट सकता है। और ऐसे भी नहीं है कि आज तक कोई बड़ी घटना नहीं घाटी अवैध खदान व क्रेशर उद्योग में कई मज़दूरों को अपना जान गवाना पड़ा है। लेकिन प्रशासन ने इस विषय पर कभी गंभीरता दिखाई ही नहीं है। अब तक कई बेगुनाह मज़दूरों ने अपना जान गवा दिया।
*पर्यावरण पर असर , सड़कें भी जर्जर, बीमारी का खतरा*
फोटो में दिखने वाली खदान ओपनकास्ट माइनिंग का उदाहरण है। ग्रामीणों के मुताबिक इस तरह के बारिश का पानी गड्ढों में भरने से भूजल बाधित होता है। आसपास के कुओं-बोर का पानी नीचे जा सकता है। डोलोमाइट की ड्रिलिंग-कटाई अत्यधिक क्रेशर वह खदान से निकलने वाली धूल से मजदूरों को सिलिकोसिस ,टीवी, सास संबंधित विभिन्न बामारियों जैसी का खतरा। आसपास की फसल पर भी बुरा असर पड़ रहा, पेड़ कटने से पक्षी-जानवरों का ठिकाना खत्म होते जा रहा है। हरियाली भूमि पर अवैध खदान का खतरा बढ़ते जा रहा है और दिन-ब-दिन पेड़ पौधे की लगातार कटाई हो रही है। सरिया बरमकेला क्षेत्र में अगर अवैध खनन बंद होकर वैध खदान से राजस्व से लेकर ग्राम पंचायत तक विकास पहुंचेगी , जैसे कि ग्राम पंचायत में लगातार गौण खनिज व DMF फंड से
कैंटीन, पीने का पानी, शौचालय, सड़क, स्कूल, अस्पताल आदि DMF फंड और गौण खनिज मद से विकास का कार्य किया जाता है।
संवाददाता चंद्रिका प्रसाद भास्कर
