उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार जनपद मुख्यालय स्थित *हवाई पट्टी, अम्बेडकर नगर* में दो दिवसीय *जनपद स्तरीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला* का शुभारम्भ किया गया। कार्यशाला के प्रथम दिवस के मुख्य अतिथि *श्री ओमप्रकाश राजभर*, माननीय कैबिनेट मंत्री, पंचायती राज, अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज तथा जनपद प्रभारी मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार रहे।
कार्यक्रम में *डॉ. हरिओम पांडेय, माननीय सदस्य विधान परिषद (अयोध्या-अम्बेडकर नगर), **श्री श्याम सुंदर वर्मा, माननीय अध्यक्ष, जिला पंचायत अम्बेडकर नगर, **श्री धर्मराज निषाद, माननीय विधायक कटेहरी, **श्रीमती ईशा प्रिया, जिलाधिकारी अम्बेडकर नगर, **श्री आनंद कुमार शुक्ला, मुख्य विकास अधिकारी, **डॉ. अश्वनी कुमार सिंह, उपनिदेशक कृषि तथा **श्री अरविंद चौधरी*, जिला कृषि अधिकारी सहित कृषि, संबद्ध एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र पांती अम्बेडकर नगर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष ,शस्य एवं उद्यान वैज्ञानिक तथा बड़ी संख्या में प्रगतिशील कृषक एवं कृषि सखी उपस्थित रहीं।
मुख्य अतिथि श्री ओमप्रकाश राजभर ने फीता काटकर केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में समेकित जनकल्याण एवं जनजागरूकता अभियान के अंतर्गत जनपद जनपद स्तरीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला के आयोजन की शुरुआत करते हुए हवाई पट्टी प्रांगण में लगे स्टालों का अवलोकन किया तत्पश्चात
अपने संबोधन में कहा कि प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार एवं किसानों की लागत कम करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाकर सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादन करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र, अम्बेडकर नगर के *वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. रामजीत, ने संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती एक टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि प्रणाली है। इससे मृदा की उर्वरता एवं जैव विविधता का संरक्षण होता है तथा किसानों की उत्पादन लागत में कमी आती है। साथ ही साथ प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।
डॉ. प्रदीप कुमार कनौजिया
शस्य वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र अम्बेडकर ने प्राकृतिक खेती के प्रमुख घटकों जैसे बीजामृत, जीवामृत एवं घनजीवामृत की निर्माण विधि एवं उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाकर किसान रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करते हुए स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा किसान भाइयों से हरी खाद फसल जैसे ढैंचा, सनई , दलहनी फसल एवं फसल चक्र अपनाने पर जोर देते हुए अनुरोध करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती से मृदा की उर्वरा शक्ति, जैव विविधता तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है, साथ ही किसानों की लागत में कमी व आय में वृद्धि की भी व्यापक संभावनाएँ हैं।
डॉ. लोकेश यादव
उद्यान वैज्ञानिक ने फल एवं सब्जी फसलों में प्राकृतिक खेती की उपयोगिता पर जानकारी दी। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग, जैविक पोषण प्रबंधन तथा प्राकृतिक कीट एवं रोग नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता बढ़े और पर्यावरण भी सुरक्षित रहे।
कार्यशाला के दौरान किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया तथा उन्हें प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती से संबंधित तकनीकी साहित्य का भी वितरण किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य जनपद के अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती की वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ते हुए टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देना तथा रसायन-मुक्त कृषि उत्पादन के प्रति जागरूक करना है। दो दिवसीय इस कार्यशाला के आगामी सत्रों में भी प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
कार्यक्रम में हजारों की संख्या में कृषक एवं महिला सखी मौजूद रही।
राजेंद्र प्रताप सिंह
