*8 फीट 3 इंच के रास्ते को 16 फीट बनाने का विरोध, खेतों में चली जेसीबी, ग्रामीण बोले—"हमारी जमीन पर नहीं चलेगी मनमानी"*
l जनपद के अकबरपुर तहसील अंतर्गत ग्राम रग्घुपुर में एमएलसी निधि से निर्मित हो रही सड़क को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जहां एक ओर सड़क निर्माण को विकास की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर गांव के दर्जनों ग्रामीण इसे किसानों की जमीन पर अतिक्रमण और दबाव बनाकर किए जा रहे चौड़ीकरण का मामला बता रहे हैं।गांव निवासी सुनील कुमार यादव, राज दीपक एवं अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव में वर्षों से चला आ रहा लगभग 8 फीट 3 इंच चौड़ा रास्ता अचानक बिना किसी स्पष्ट सूचना, सहमति और सार्वजनिक जानकारी के 16 फीट चौड़ा किया जा रहा है। तथा खेतों के सिंचाई के लिए बनाई गई नाली को भी पाठ लिया जा रहा है ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के नाम पर जेसीबी मशीनों से रास्ते के दोनों ओर स्थित खेतों की खुदाई कर किसानों की भूमि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने इस कार्य का विरोध किया और चौड़ीकरण का आधार पूछा तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इतना ही नहीं, विरोध करने वालों को कथित रूप से डराने-धमकाने और दबाव बनाने की भी कोशिश की गई। इससे पूरे गांव में आक्रोश का माहौल है और ग्रामीण प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैंग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क चौड़ी की जानी थी तो पहले राजस्व विभाग से पैमाइश कराई जानी चाहिए थी, ग्राम सभा की बैठक में प्रस्ताव रखा जाना चाहिए था तथा प्रभावित किसानों की सहमति ली जानी चाहिए थी। उनका सवाल है कि आखिर किस आदेश के तहत 8 फीट 3 इंच के रास्ते को सीधे 16 फीट में परिवर्तित किया जा रहा है और यदि भूमि निजी है तो उसका अधिग्रहण किस प्रक्रिया के तहत किया गया है?
मामले को लेकर गांव में चर्चा का विषय यह भी बना हुआ है कि विकास कार्यों की आड़ में कहीं किसानों की जमीन पर अतिक्रमण तो नहीं किया जा रहा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे उच्च अधिकारियों से लेकर शासन स्तर तक शिकायत करने को मजबूर होंगे।वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और नियमों का पालन होना चाहिए ताकि विकास कार्य विवाद का कारण न बनें। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
नोट: समाचार में वर्णित आरोप संबंधित ग्रामीणों द्वारा लगाए गए हैं प्रशासनिक जांच एवं संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान आना शेष है।
राजेंद्र प्रताप सिंह*
