योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के संतुलन की प्राचीन भारतीय साधना पद्धति है: सनातन स्वामी
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को गुप्तार घाट स्थित महर्षि कार्तिकेय आश्रम आनंदधाम वटवृक्ष परिसर में भव्य योग साधना एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों योग साधकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर योगाभ्यास किया।
हिमालय से पधारे महर्षि कार्तिकेय जी की कृपा पात्रता से पूज्य श्रीमद् जगतगुरु श्री श्री आदि सनातन स्वामी जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में साधकों को सूक्ष्म योग, कुंडलिनी योग, प्राणायाम एवं ध्यान की विभिन्न विधियों का प्रशिक्षण दिया गया। महाराज जी ने उंगली योग, शरीर के सूक्ष्म बिंदुओं की जागरूकता तथा ध्यान की विशेष तकनीकों का अभ्यास कराते हुए इनके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों की जानकारी दी।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के संतुलन की प्राचीन भारतीय साधना पद्धति है, जिसकी जड़ें सनातन वैदिक परंपरा में निहित हैं। उन्होंने सभी को नियमित योग को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संदेश दिया।
इस वर्ष की थीम "स्वस्थ एवं संतुलित वृद्धावस्था के लिए योग" के अनुरूप साधकों को विभिन्न योग क्रियाओं का अभ्यास कराया गया। कार्यक्रम में योग के माध्यम से स्वास्थ्य संरक्षण, मानसिक शांति और आध्यात्मिक जागरण पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम में योग गुरु रामसुफल, रवि सोनकर, अमल गुप्ता, धनंजय पांडे, नीलम जैसवाल, भैरव सिंह, अशोक चौरसिया, अशुतोष पांडे, दिलीप दुबे, अमित पाठक सहित बड़ी संख्या में योग साधक उपस्थित रहे। वटवृक्ष की पावन छाया में सम्पन्न यह आयोजन भारतीय योग परंपरा के संरक्षण, संवर्धन एवं जन-जागरूकता का प्रेरणादायी केंद्र बना।
योग करवाते फोटो
