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टिमरनी मंडी में अटैचमेंट पर सवाल: सरसों भवांतर योजना खत्म होने के बाद भी क्यों नहीं लौटे मंडी निरीक्षक अशोक राजपूत?..........NN81




खिरकिया टिमरनी। कृषि उपज मंडी व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती का विशेष महत्व होता है, लेकिन जब आवश्यकता वाले स्थान पर स्टाफ की कमी हो और दूसरी ओर अस्थायी व्यवस्था स्थायी रूप ले ले, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसा ही मामला इन दिनों खिरकिया और टिमरनी कृषि उपज मंडियों को लेकर चर्चा में है, जहां मंडी निरीक्षक अशोक राजपूत का टिमरनी मंडी में किया गया अटैचमेंट विवाद और चर्चाओं का विषय बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार सरसों भवांतर भुगतान योजना के दौरान अतिरिक्त कार्यभार को देखते हुए मंडी निरीक्षक अशोक राजपूत को खिरकिया कृषि उपज मंडी से टिमरनी मंडी में अटैच किया गया था। उस समय योजना से जुड़े कार्यों के संचालन और किसानों के भुगतान संबंधी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने के लिए यह व्यवस्था की गई थी। लेकिन अब सरसों भवांतर योजना समाप्त हुए काफी समय बीत चुका है, इसके बावजूद उनका अटैचमेंट समाप्त नहीं किया गया है।

टिमरनी में पहले से मौजूद हैं दो मंडी निरीक्षक

सूत्रों के अनुसार टिमरनी कृषि उपज मंडी में पहले से ही दो मंडी निरीक्षक पदस्थ हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब वहां नियमित रूप से दो निरीक्षक कार्यरत हैं और भवांतर योजना भी समाप्त हो चुकी है, तब अतिरिक्त रूप से अशोक राजपूत की सेवाएं वहीं क्यों ली जा रही हैं।

किसानों और व्यापारियों का कहना है कि यदि किसी विशेष योजना के कारण अस्थायी रूप से अटैचमेंट किया गया था, तो योजना समाप्त होने के बाद संबंधित अधिकारी को मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजा जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं होने से कई तरह की चर्चाएं जन्म ले रही हैं।

खिरकिया मंडी में स्टाफ की कमी बनी बड़ी समस्या

दूसरी ओर खिरकिया कृषि उपज मंडी में स्टाफ की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही है। मंडी में किसानों की बड़ी संख्या में आवक होती है और नीलामी, तौल, राजस्व वसूली, रिकॉर्ड संधारण तथा अन्य व्यवस्थाओं के लिए पर्याप्त अमले की आवश्यकता रहती है।

बताया जा रहा है कि वर्तमान में खिरकिया मंडी में दो सहायक उपनिरीक्षक होने के बावजूद कर्मचारियों की भारी कमी है। किसानों और व्यापारियों का आरोप है कि पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण कई व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। नीलामी प्रक्रिया में निगरानी, किसानों की समस्याओं का त्वरित निराकरण और मंडी परिसर की व्यवस्थाओं में भी अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है।

नीलामी व्यवस्था और किसानों की परेशानी

किसानों का कहना है कि फसल लेकर मंडी पहुंचने पर उन्हें कई बार आवश्यक मार्गदर्शन और निगरानी का अभाव महसूस होता है। मंडी में अधिकारी और कर्मचारियों की उपलब्धता कम होने से व्यवस्थाओं पर असर पड़ता है। व्यापारियों का भी मानना है कि यदि मंडी में पर्याप्त अमला उपलब्ध रहे तो नीलामी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से संचालित हो सकती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि खिरकिया मंडी क्षेत्र की प्रमुख कृषि उपज मंडियों में से एक है, जहां आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने आते हैं। ऐसे में यहां स्टाफ की कमी का सीधा असर किसानों और व्यापारियों दोनों पर पड़ रहा है।

उठ रहे प्रशासनिक सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब टिमरनी मंडी में पहले से पर्याप्त निरीक्षक उपलब्ध हैं और जिस उद्देश्य से अटैचमेंट किया गया था वह कार्य भी समाप्त हो चुका है, तो फिर अशोक राजपूत का अटैचमेंट अभी तक समाप्त क्यों नहीं किया गया?

कृषि उपज मंडी से जुड़े लोगों का मानना है कि प्रशासन को दोनों मंडियों की वास्तविक आवश्यकता का आकलन कर कर्मचारियों की तैनाती करनी चाहिए। जहां स्टाफ की कमी है, वहां अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि किसानों और व्यापारियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

किसानों और व्यापारियों की मांग

क्षेत्र के किसानों और व्यापारियों ने मांग की है कि मंडी प्रशासन एवं उच्च अधिकारी पूरे मामले की समीक्षा करें। यदि टिमरनी मंडी में अतिरिक्त स्टाफ की आवश्यकता नहीं है, तो मंडी निरीक्षक अशोक राजपूत को पुनः खिरकिया मंडी में पदस्थ किया जाए, जिससे वहां की व्यवस्थाओं में सुधार हो सके और किसानों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

अब देखना यह होगा कि मंडी प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारी इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेते हैं और खिरकिया मंडी में लंबे समय से महसूस की जा रही स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। किसानों और व्यापारियों की निगाहें अब प्रशासनिक निर्णय पर टिकी हुई हैं।

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