नगर पालिका बेमेतरा की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, संवाददाता ने फोटो-वीडियो में कैद किया पूरा मामला
रिपोर्ट: गोपेश साहू
बेमेतरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य देश को खुले में शौच से मुक्त करने के साथ-साथ मानव मल (फीकल स्लज) का वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित करना है। इसी उद्देश्य से केंद्र और राज्य सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) स्थापित किए गए हैं तथा डीस्लजिंग वाहनों की व्यवस्था भी की गई है।
छत्तीसगढ़ में भी इस दिशा में लगातार कार्य हो रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण में कुम्हारी नगर पालिका ने 20 हजार से 50 हजार आबादी श्रेणी में देशभर में तीसरा स्थान प्राप्त किया, वहीं पाटन ने सुपर स्वच्छ लीग में अपनी अलग पहचान बनाई। लेकिन इन उपलब्धियों के बीच नगर पालिका बेमेतरा का एक मामला स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
खुले मैदान में फेंका जा रहा था स्लज
हमारे संवाददाता गोपेश साहू ने मौके पर पहुंचकर देखा कि नगर पालिका का डीस्लजिंग वाहन खुले क्षेत्र में फीकल स्लज खाली कर रहा था। पूरे घटनाक्रम का फोटो एवं वीडियो मौके पर ही रिकॉर्ड किया गया, जिसमें वाहन से सीधे जमीन पर स्लज छोड़ा जाता दिखाई दे रहा है।
यदि यह स्लज अधिकृत फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) में ले जाने के बजाय खुले में डाला गया है, तो यह पर्यावरण, जनस्वास्थ्य तथा स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों के विपरीत माना जा सकता है।
अधिकारियों के दावों पर सवाल
सरकारी अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को खुले में स्लज नहीं फेंकने, उससे होने वाले प्रदूषण और संक्रामक बीमारियों के प्रति जागरूक करते हैं। लेकिन यदि सरकारी वाहन ही ऐसा करता दिखाई दे, तो इससे आम जनता के बीच गलत संदेश जाता है और शासन की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न उठते हैं।
सीएमओ से पूछने पर क्या मिला जवाब?
जब वाहन चालक से इस संबंध में जानकारी ली गई तो उसने स्पष्ट जवाब नहीं दिया। वहीं नगर पालिका बेमेतरा के सीएमओ देवेंद्र वर्मा से दूरभाष पर संपर्क करने पर पहले मामले को टालने का प्रयास किया गया। बाद में वाहन और वीडियो दिखाए जाने पर गलती स्वीकार किए जाने की बात सामने आई।
अब उठ रहे हैं बड़े सवाल
क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी?
क्या भविष्य में फीकल स्लज का निस्तारण केवल अधिकृत ट्रीटमेंट प्लांट में ही सुनिश्चित किया जाएगा?
क्या स्वच्छ भारत मिशन के नियम सरकारी विभागों पर भी समान रूप से लागू होंगे?
अब जनता की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। यदि मामले में अनियमितता पाई जाती है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती, तो स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों और सरकारी दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक होगा।

