जिला कारागार सिद्धार्थनगर में बंदियों के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास के उद्देश्य से प्रतिदिन प्रातःकाल आर्ट ऑफ लिविंग एवं योग सत्र का नियमित आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम जेल अधीक्षक श्री सचिन वर्मा के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में संचालित हो रहा है, जिसमें आर्ट ऑफ लिविंग प्रशिक्षक श्री अभिनव मालवीय एवं प्रशिक्षिका प्रतिभा द्विवेदी द्वारा बंदियों, अधिकारियों तथा कर्मचारियों को योग, प्राणायाम, ध्यान एवं जीवन प्रबंधन की विभिन्न विधियों का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
जिला कारागार सिद्धार्थनगर में संचालित यह कार्यक्रम केवल एक नियमित योगाभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बंदियों के व्यक्तित्व निर्माण, मानसिक तनाव में कमी, सकारात्मक सोच के विकास तथा आत्मिक शांति प्राप्त करने का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है। प्रतिदिन प्रातः निर्धारित समय पर कारागार परिसर में बंदी बड़ी संख्या में एकत्रित होकर प्रशिक्षकों के निर्देशन में योगाभ्यास, ध्यान , सुदर्शन क्रिया की विभिन्न गतिविधियों में सहभागिता करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षक श्री अभिनव मालवीय द्वारा बंदियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, सकारात्मक चिंतन विकसित करने तथा तनावमुक्त जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जाता है। वहीं प्रशिक्षिका प्रतिभा द्विवेदी द्वारा योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान की विभिन्न तकनीकों का अभ्यास कराया जाता है, जिससे बंदियों के शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ मानसिक एकाग्रता एवं आत्मविश्वास में भी वृद्धि हो रही है।
विशेष उल्लेखनीय तथ्य यह है कि जिला कारागार सिद्धार्थनगर के अधीक्षक श्री सचिन वर्मा स्वयं प्रतिदिन इन सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। उनका मानना है कि योग एवं ध्यान केवल स्वास्थ्य सुधार का साधन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा प्रदान करने का प्रभावी माध्यम भी है। अधीक्षक श्री वर्मा की नियमित सहभागिता बंदियों एवं कर्मचारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। वे स्वयं योगाभ्यास कर यह संदेश देते हैं कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन किसी भी व्यक्ति के सफल एवं संतुलित जीवन की आधारशिला हैं।
श्री सचिन वर्मा द्वारा समय-समय पर बंदियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आर्ट ऑफ लिविंग तथा योग गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। उनके मार्गदर्शन में कारागार प्रशासन यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक बंदी को मानसिक तनाव, चिंता एवं नकारात्मक विचारों से मुक्त होकर सकारात्मक जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हो। अधीक्षक महोदय का मानना है कि सुधारात्मक न्याय व्यवस्था का मूल उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाना भी है। इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु कारागार में नियमित रूप से योग, ध्यान एवं आध्यात्मिक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।
आर्ट ऑफ लिविंग कार्यक्रम के माध्यम से बंदियों को श्वास संबंधी विभिन्न तकनीकों, ध्यान, आत्मनिरीक्षण तथा भावनात्मक संतुलन बनाए रखने के उपायों की जानकारी दी जाती है। प्रशिक्षकों द्वारा यह समझाया जाता है कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, संयम एवं सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इन गतिविधियों के माध्यम से बंदियों में अनुशासन, आत्मनियंत्रण, सहनशीलता तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित हो रही है।
कारागार प्रशासन द्वारा प्राप्त अनुभवों के अनुसार नियमित योग एवं ध्यान अभ्यास से बंदियों के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले हैं। उनमें आपसी सहयोग, अनुशासन एवं सौहार्द की भावना में वृद्धि हुई है। साथ ही तनाव, क्रोध एवं मानसिक अशांति जैसी समस्याओं में भी कमी आई है। कई बंदियों ने स्वयं अनुभव साझा करते हुए बताया कि योग एवं ध्यान से उन्हें मानसिक शांति प्राप्त हुई है तथा जीवन के प्रति उनका दृष्टिकोण अधिक सकारात्मक हुआ है।
कारागार के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी इन सत्रों में सहभागिता के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। कार्य के दौरान उत्पन्न तनाव एवं मानसिक दबाव को कम करने में योग एवं ध्यान अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। अधिकारियों एवं कर्मचारियों की नियमित सहभागिता से कार्य वातावरण अधिक सकारात्मक एवं ऊर्जावान बना है। इससे प्रशासनिक कार्यों के निष्पादन में भी बेहतर परिणाम देखने को मिल रहे हैं।
संतोष कुमार
